Kites Festival: जयपुर। मकर संक्रांति का त्योहार शनिवार को अलसुबह ही खुशियों का उल्लास लेकर आया। आसमान से धरा तक उत्साह के रंग बिखरे नजर आए। अलसुबह से ही आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सतरंगी हो उठा, शहर छतों पर आ डटा, चारोओर वो काटा… का शोर गूंजने लगा। डीजे की फिल्मी धूनों के साथ ही पतंगे इठलाने लगी। आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों का राज नजर आया। खासकर चारदीवारी क्षेत्र में मकर संक्रांति का उल्लास देखने को मिला। परकोटे की पुरानी हवेलियों के साथ हर छत आबाद नजर आई। वहीं शाम होते ही दिवाली सा नजरा देखने को मिला। आतिशबाजी से धरा रोशन हो उठी, लोगों ने विशिंग लैम्प भी छोडे।
राजधानी में छतों पर डीजे पर बजते फिल्मी और राजस्थानी गानों की धुनों के बीच पतंगें भी ठुमकती नजर आई। अलसुबह ही शहर में हर ओर डीजे व फिल्मी गानों की धूनों के बीच वो काटा… का शोर गूंजायमान हो गया। छतों पर एक—दूसरे की पतंगें काटने का जुनून नजर आने लगा। लोगों ने दिनभर पतंगोत्सव का जमकर लुत्फ उठाया। परकोटे के साथ मानसरोवर, विद्याधर नगर, राजापार्क, झोटवाड़ा और वैशाली नगर की बड़ी—बड़ी छतों पर लोगों में पतंगबाजी की होड नजर आई। शहर की बाहरी कॉलोनियों में भी पतंगबाजी का जुनून देखने को मिला। बच्चों के साथ बुर्जुग, युवा और महिलाएं भी पतंग उड़ाती नजर आई। दिनभर शहर छतों पर रहा। देर शाम तक लोगों ने जमकर पतंगबाजी की। वहीं शाम होते ही आतिशबाजी और विशिंग लैंप से जमीन से आसमान तक सतरंगी रोशनी में खुशी का उल्लास देखने को मिला। इस बीच दिनभर छतों पर ही चाय—नाश्ता और भेाजन हुआ।
घर-घर में तिल के लड्डूओं की महक
संक्रांति पर तिल से बने व्यंजनों का दान किया जाता है, ऐसे में घर-घर में तिल के लड्डूओं की महक रही। दिनभर छतों पर ही लोगों ने तिल के लड्डू, फीणी के साथ पकौड़ी का आनंद लिया।
पुण्यकाल कल दोपहर 12.45 बजे तक श्रेष्ठ
इस बार मकर संक्रांति दो दिन मनाई जा रही है। आज जहां पतंगबाजी हो रही है, वहीं 15 जनवरी को दान—पुण्य का दौर चलेगा, इस दिन चित्रा नक्षत्र और सुकर्मा योग के साथ मकर राशि में त्रिग्रही योग भी बनेगा। ऐसे में मकर संक्रांति सुख समृद्धि लेकर आएगी। 15 जनवरी को सूर्योदय से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक दान—पुण्य का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा।