
पांच महीने में महज एक साधारण सभा
जयपुर
महापौर विष्णु लाटा के कार्यकाल को करीब ५ महीने का वक्त गुजर चुका है, लेकिन लाटा भी साधारण सभा करवाने में विफल नजर आ रहे हैं। पांच महीने के कार्यकाल में महज एक साधारण सभा आयोजित की गई, जबकि नगरपालिका एक्ट २००९ के अनुसार ६० दिन के भीतर साधारण सभा का आयोजन करवाना जरूरी है।
२२ फरवरी, 2019 को तत्कालीन मेयर अशोक लाहोटी के विधायक चुने जाने के बाद विष्णु लाटा गुलाबी शहर के मेयर बने थे। इसके बाद उम्मीद जगी थी कि समय पर साधारण सभा की बैठक होगी, मगर हुआ उलट। पांच महीने में एक ही साधारण सभा होने की वजह से पार्षदों में नाराजगी है। जयपुर नगर निगम की पिछली साधारण सभा 27 फरवरी को हुई थी। बोर्ड बैठक नहीं होने के कारण जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आम सभा नहीं होने से शहर के विकास और लोगों की समस्याओं से संबंधित प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो पा रही है। महापौर ने लगभग 160 दिनों के कार्यकाल के दौरान केवल एक बार सामान्य सभा की बैठक बुलाई है। जबकि उन्हें एक साल में छह बैठकें आयोजित करनी चाहिए थीं।
विधानसभा सत्र के चक्कर में अटकी बोर्ड बैठक
पिछले महीने महापौर विष्णु लाटा ने साधारण सभा की बैठक बुलाने का निर्देश दिया था, लेकिन विधानसभा और संसद के बजट सत्र के कारण बैठक आयोजित नहीं की गई थी। सांसद और विधायक भी नगरपालिका बोर्ड में सदस्य हैं। इसलिए बोर्ड की बैठक सांसद और विधायकों के अनुमोदन के बाद ही आयोजित की जा सकती है।
भाजपा का बोर्ड भी वजह!
जयपुर नगर निगम में भाजपा का बहुमत है। जबकि लाटा को कांग्रेस के समर्थन से महापौर के रूप में चुना गया था। इसलिए वह बोर्ड बैठक से बचने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा पार्षदों ने आम सभा की अंतिम बैठक का बहिष्कार किया था। जिससे बैठक सफल रही। इस बार भाजपा बैठक का बहिष्कार करने के मूड में नहीं है। ऐसे में भाजपा पार्षद महापौर का विरोध कर सकते हैं। यही कारण है कि महापौर बैठक से बचते नजर आ रहे हैं।
Updated on:
23 Jul 2019, 9:17 PM IST
Published on:
23 Jul 2019, 9:14 PM IST
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