जयपुर। राज्य की सबसे बड़ी हिंगोनिया गोशाला में बायो गैस प्लांट लगाया जा रहा है। मई में यह काम करना शुरू हो जाएगा। पहली बार किसी गोशाला में इस तरह का प्लांट लगाकर गोबर से बड़े स्तर पर गैस बनाई जाएगी। इससे न सिर्फ गोबर का उपयोग होगा, बल्कि गोशाला को आर्थिक मजबूती भी मिलेगी। जो सीएनजी बनेगी, उसकी आइओसीएल श्रीकृष्ण बलराम सेवा ट्रस्ट से खरीदेगा। इससे गोशाला को आय भी होगी। अभी गोशाला में गोवंश के रखरखाव में हर महीने दो करोड़ रुपए से अधिक खर्च होता है।
दरअसल, इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2020 में हुई थी। कोरोना की वजह से कुछ महीने प्रोजेक्ट में देरी हो गई। मई में इसे चालू करने का दावा किया जा रहा है।
खास—खास
—01 लाख किलो प्लांट के लिए चहिए गोबर
—32 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं आईओसीएल की ओर से
—06 हजार किलो ग्राम गैस प्रतिदिन बन सकेगी इस प्लांट में
—13300 गोवंश है हिंगोनिया गोशाला में इन दिनों
—15 ट्रैक्टर हैं गोशाला के पास, इनको सीएजनी में बदला जाएगा।
—02 दिन की गैस से महीने भर दौड़ सकेंगे गोशाला के संसाधन
ये होगा फायदा
—जो सीएनजी बाहर बेची जाएगी, उससे शहर में वाहनों का संचालन होगा।
—गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी
—ऐसी गाय जो दूध नहीं दे रहीं हैं, उनका भी गोशाला पर अब भार नहीं पड़ेगा।
—प्रक्रिया के बाद जो गोबर बचेगा, उसका उपयोग खाद के तौर पर पेेड़ पौधों और खेती में किया जाएगा।
पूरी तरह है स्वचलित
इस प्रोजेक्ट से गोशाला के कदम आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ेगे। लोगों के भी यह जानकारी में आएगा कि कि अगर गाय दूध नहीं दे रही है, तब भी वह आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकती है। यह संयंत्र पूरे राज्य में अपनी तरह का पहला संयंत्र है। जो पूरी तरह से स्वचालित है।
—रघुपति दास, कार्यक्रम समन्वयक, श्री बलराम सेवा ट्रस्ट