14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जयपुरः नहर के गणेश मंदिर, जानें क्या है मंदिर का इतिहास

नहर के गणेश मंदिर जयपुर में स्थित एक अनोखा मंदिर माना जाता है। करीब 250 साल पुराना गजानन का ये मंदिर नाहरगढ़ पहाड़ी के तलहटी में बसा हुआ है।

2 min read
Google source verification
photo1661589476_2.jpeg

नहर के गणेश मंदिर जयपुर में स्थित एक अनोखा मंदिर माना जाता है। करीब 250 साल पुराना गजानन का ये मंदिर नाहरगढ़ पहाड़ी के तलहटी में बसा हुआ है। नहर किनारे होने के कारण मंदिर का नाम ही नहर वाले गणेशजी पड़ गया। यहां पर दाहिनी सूंड वाले दक्षिणमुखी भगवान गणेश विराजे हैं।

यहां उलटे स्वास्तिक बनाने की भी बड़ी मान्यताएं है। कहा जाता है यहां उल्टा स्वास्तिक बनाने से लोगों के सारे बिगड़े काम बनने शुरू हो जाता हैं। हालांकि मंदिर के युवाचार्य मानव शर्मा का कहना है कि यह धार्मिक मान्यता है। मंदिर प्रशासन ने कभी उलटा स्वास्तिक नहीं बनाया। कई भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हुई, जिसके बाद से यहां आने वाले भक्त उलटा स्वास्तिक बनाते हैं।

मंदिर का इतिहास

तंत्र साधना करने वाले ब्रह्मचारी बाबा द्वारा किए गए यज्ञ की भस्म से भगवान गणेश का ये विग्रह व्यास राम चंद्र ऋग्वेदी ने प्राण प्रतिष्ठित किया। उन्हीं की पांचवी पीढ़ी आज भी यहां पूजा-आराधना कर रही है। यहां दाहिनी तरफ सूंड और दक्षिणा विमुख भगवान गणेश पूजे जाते हैं। इस तरह प्रतिमा तंत्र विधान के लिए होती है। ब्रह्मचारी बाबा तंत्र गणेश जी के उपासक थे और नियमित भगवान गणेश की प्रत्यक्ष आराधना करते थे। शास्त्रों में भगवान गणेश के प्राकट्य की कथा के अनुसार पार्वती माता ने अपने मैल से विनायक के विग्रह को बनाकर उसमें प्राण फूंके थे। आज भी मांगलिक कार्यों में मिट्टी से बने हुए गणेश जी ही स्थापित किए जाते हैं। उसी तरह ब्रह्मचारी बाबा ने यज्ञों में दी गई आहुति से तैयार हुई भस्म रूपी मिट्टी से भगवान गणेश का विग्रह तैयार किया।

प्राचीन काल से भक्त कर रहे है इन परम्पराओं का पालन
नहर के गणेश जी को पारंपरिक राजशाही जरी की पोशाक धारण कराई जाती है। रत्न और गोटा-पत्ती जड़ी इस पोशाक का वजन 20 किलो है। पोशाक का निर्माण एक महीने पहले से शुरू करा दिया जाता है। यह पोशाक विशेष कारीगरों द्वारा बनाई जाती है। पुराने समय से ही जरी की पोशाक को जयपुरी शान माना जाता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है, पत्रिका इस बारे में कोई पुष्टि नहीं करता है I इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया हैI