
जयपुर. शादी- त्यौहारों का सीजन शुरु हुआ ही था कि अचानक कोरोना महामारी ने देश में अपने पैर पसारने शुरु कर दिए। नतीजन सरकार को कोरोना संक्रमण की चैन तोड़ने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन लगाना पड़ा। जिसका असर सबसे ज्यादा मेंहदी आर्टिस्टों पर पड़ा। क्योंकि मार्च अप्रेल महीना शादी त्यौहारों का होता है और इसी वक्त कोरोना महामारी फैल गई।
इस बीमारी में सोशल डिस्टेंसिंग रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में लॉकडाउन खुल भी जाए तो हमें काम नहीं मिलेगा, क्योंकि मेहंदी डिस्टेंस पर नहीं लगाई जा सकती। जुलाई से चार महीने का मलमास आ जाएगा। इस तरह इस साल तो हमें काम मिलेगा ही नहीं। हम लोगों की कमाई भी इतनी नहीं होती कि अच्छी बचत कर पाएं। अब समाज सेवियों की ओर से जो भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है उसी से गुजारा कर रहे हैं।
लॉकडाउन खुल भी जाएगा तो भी काम नहीं मिलेगा
हसनपुरा निवासी मेंहदी आर्टिस्ट मोहन लाल चौहान ने बताया कि वो पिछले बीस सालों से मेंहदी लगाने का ही काम कर रहे हैं। रोजाना मेहंदी लगाने से जो रुपए मिलते थे, उसी से पूरे परिवार का पेट पाल रहा था। एक महीना हो गया लॉकडाउन को हम बेरोजगार बैठे हैं। लॉकडाउन खुल भी जाएगा तो भी काम नहीं मिलेगा। कोई अन्य काम हमें आता नहीं, ऐसे में घर खर्च कैसे चलेगा यही चिंता खाए जा रही है। अभी समाजसेवी संस्था से जो खाने के पैकेट मिल रहे हैं, उन्हीं से काम चला रहे हैं।
बिना रोजगार परिवार का पेट कैसे पालें
वहीं परकोटा निवासी ममता जोशी का कहना है कि समारोह का यह सीजन निकल गया। वहीं जून तक की शादियां कैंसिल हो गई हैं। इसके बाद जुलाई से अक्टूबर तक चार महीने का मलमास शुरु हो जाएगा तो वैसे ही शादियां नहीं होगी। सवा महीने के लॉकडाउन के खुलने के बाद भी हमे काम नहीं मिलेगा। परिवार में तीन बेटियां हैं। हमारे बेरोजगार होने की वजह से परिवार का पेट कैसे पालेंगे यही सबसे बड़ी समस्या है।
वहीं ट्रांसपोर्ट नगर निवासी आरती शर्मा ने बताया कि किराए के मकान में रहती हूं, किराए के लिए भी पैसे नहीं बचें। प्रशासन से राशन तो मिल गया, लेकिन किराए का जुगाड़ नहीं हुआ तो परिवार सड़क पर आ जाएगा।
कलाकारों की सहायता के लिए प्रशासन आगे आए
पानीपेच निवासी सुनील कुमावत ने बताया कि एक महीने तो कर्जा लेकर घर खर्च चला लिया। अब समाजसेवी हमारी राशन देकर मदद कर रहे हैं। लेकिन जो कर्जा लिया है वो कैसे चुकाएंगे और कब तक समाजसेवियों के आगे हाथ फैलाएं। ऐसे में हमारे जैसे कलाकारों की सहायता के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने चाहिए। ताकि दाने दाने के लिए हमें किसी का मोहताज नहीं होना पड़े।
Published on:
24 Apr 2020 10:00 am
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