
जयपुर की इस पहाड़ी पर है ऐसी औषधियां, जिन्हें खाकर बंदरों के हो रहे हैं जुडवां बच्चे, जड़ी-बूटी तलाशने में जुटे लोग
अजय सोलोमन / जयपुर। देश में प्राचीन काल से ही पहाड़ और वनों में औषधियां मिलती रही हैं। जयपुर में स्थित अरावली की पहाड़ियों में भी आयुर्वेद ( Ayurveda ) में काम आने वाली विभिन्न जड़ी—बूटियां ( herbs ) बहुतायत में मिलती हैं। जिन्हें दवाओं में काफी इस्तेमाल किया जाता है। जयपुर में स्थित गालव ऋषि ( Galav Rishi ) की तपस्या स्थली गलता तीर्थ ( Galta Temple ) की पहाड़ियों में पैदा होने वाली ऐसी ही जड़ी बूटियों ने लाल मुंह के बंदरों के प्रजनन शक्ति को ही बदल दिया है। अकसर लाल मुंह के बंदरों के एक ही बच्चा पैदा होता है, लेकिन यहां अधिकांश मादाओं के जुड़वां बच्चे पैदा हो रहे हैं।
मंकीज वैली ( Monkey Valley ) के नाम से विख्यात गलता तीर्थ में निवास करने वाले कई मादा बंदरों ने इस बार दो बच्चों को जन्म दिया है। अमुमन लाल मुंह के मादा बंदर के एक ही बच्चा पैदा होता है। लाल मुंह के अनेक मादा बंदर इन दिनों जुड़वां जन्में दो बच्चों के साथ सुख महसूस कर रहे हैं। नेशनल नेचर सोसायटी के सचिव राज चौहान के मुताबिक अक्सर बंदर के एक ही बच्चा होता है। पहाडिय़ों में वन औषधियों का सेवन करने से दो बच्चे हो सकते है।
चट्टानों में बहता है शिलाजीत
गलता तीर्थ की पहाड़ी पर आज भी जड़ी-बूटियों की भरमार है। यहां की जड़ी बूटियों का दवाइयों में इस्तेमाल हो रहा है। अब पहले जितनी वन औषधियां नहीं मिलती लेकिन ऊंची चट्टान पर काले नीले रंग का पदार्थ रिसता है, जिसे लोग शिलाजीत ( shilajit ) होना मानते हैं। आयुर्वेद की अनेक दवाओं में शिलाजीत का उपयोग होता है। गर्मियों में द्रव्य के रूप में शिलाओं का गंगा को गोमुख में प्रवाह करने वाले संत कृष्णदास पयोहारी की गुफा के ऊपर एक टेड़ी चट्टान के बीच की शिलाओं से यह पदार्थ निकलता है। आम लोग भी यहां आते हैं और बूटियां ढूंढते हैं। आयुर्वेद ग्रंथों के मुताबिक तेज गर्मी में पहाड़ी की शिलाओं के बीच से निकलने वाले गोंद रूपी तरल सार को शिलाजीत बताया है।
शिलाजीत से ये दवाइयां बनती है
वन औषधि के वैद्य शंभू शर्मा के मुताबिक पत्थर से निकलने वाले द्रव्य शिलाजीत का शोधन करने के बाद ही काम में लिया जा सकता है। इससे दवाइयां बनती हैं। गलता में पहले वन औषधियां भी बहुत थी। कनक चम्पा, चिरायता, सालर, वज्रदंती, पत्थर चट्टी, चीरमी, नीम गिलोय, गंधारी, कालीजीरी, काक जंघा, बापची, कौंच, राजपीपल, शतावरी जैसी वन औषधियों से आयुर्वेद चिकित्सक दवाइयां बनाते थे।
यहां भी पाया जाता है शिलाजीत
हरिद्वार, शिमला, नेपाल, हिमाचल के पर्वतों में शिलाजीत पाया जाता है। दूदू के पास बिचून में दादू पालकिया पहाड़ की चट्टानों से भी शिलाजीत रिसता बताया।
Published on:
25 Jun 2019 07:22 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
