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हैरिटेज वॉक वे: कमेटी के सदस्यों को कहीं नए निर्माण होते मिले, जो पत्थर बिछाए वो रास नहीं आए

—नए निर्माण देख सांसद रामचरण बोहरा ने जताई नाराजगी

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जयपुर। शहरी विकास पर लोकसभा सचिवालय की स्टैंडिंग कमेटी ने रविवार को राजधानी के परकोटा क्षेत्र में घूमकर जमीनी हकीकत जांची। स्मार्ट सिटी और हैरिटेज नगर निगम केे अधिकारियों की सबसे ज्यादा फजीहत हैरिटेज वॉक वे पर हुई। यहां सड़क पर बिछाए गए कोबल स्टोन तक को बदलने की सलाह कमेटी के चेयरमैन जगदम्बिका पाल ने दी। उन्होंने कहा कि यह ठीक नहीं हैं। बुजर्ग लोगों को चलने में खासी दिक्कत होती होगी। कुछ क्षेत्रीय लोगों ने कमेटी के सदस्यों से निगम और स्मार्ट सिटी के कार्यशैली की शिकायत भी की। लोगों ने यहां तक कहा कि आप सभी के निरीक्षण की वजह से साफ—सफाई हुई है। वैसे तो शिकायत पर भी सुनवाई नहीं होती।
दरअसल, टीम आने की सूचना मिलने के बाद पांच दिन पहले अधिकारी सक्रिय हुए। हैरिटेज लुक में वॉक वे पर फटाफट लाइटें लगवाईं और उनको जला भी दिया। जब कमेटी के सदस्य पहुंचे तो क्षेत्रीय लोगों ने कहा कि तीन दिन पहले ही चालू हुई हैं। लटक रहे केबल और विद्युत तारों पर भी नाराजगी जाहिर की। निरीक्षण के दौरान हैरिटेज वॉक पर कुछ नए निर्माण होते हुए भी मिले। इस पर सांसद रामचरण बोहरा ने नाराजगी जाहिर करते हुए स्वायत्त शासन विभाग के सचिव भवानी सिंह देथा को प्रकरण दिखवाने की बात कही। इससे पहले माणक चौक स्थित महाराजा स्कूल की इमारत को देखा। यहां धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्य पर जगदम्बिका पाल ने नाराजगी जाहिर की।


निगम दिखा बेहद सक्रिय
—टीम के स्वागत में निगम पिछले पांच दिनों से नगर निगम साफ—सफाई बेहद सक्रिय था। जिन जगहों पर टीम को जाना था, वहां साफ—सफाई बेहतर दिखाई दी। अस्थाई अतिक्रमण तक हटावाए। हैरिटेज वॉक वे पर तो निरीक्षण के दौरान दुकानें तक बंद करवा दीं।
—इसी वजह से हैरिटेज वॉक वे का अलग रूप दिखाई दिया। आम दिनों में यहां अतिक्रमण, अव्यवस्थित पार्किंग से लोग परेशान रहते हैं।


ऐसे किया कमेटी ने निरीक्षण
कमेटी के सदस्यों ने गोविंददेवजी मंदिर के दर्शन किए। इसके बाद महाराजा स्कूल पहुंचे। बड़ी चौपड़ से छोटी चौपड़ का सफर मेट्रो से किया। यहां से स्कूल आॅफ आॅर्ट के म्यूजियम को देखा फिर हैरिटेज वॉक वे का निरीक्षण किया। यहां से ताड़केश्वर मंदिर भी टीम गई।

सांसद की सहमति से हो डीपीआर में बदलाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि देश के शहरों की तस्वीर बदली जाए। इसी के तहत 100 शहरों का चयन हुआ है। केंद्र सरकार शहरों को पैसा भेज रही है। इसका सही तरह से उपयोग हो और कामकाज की गुणवत्ता बेहतर हो, इसीलिए यह दौरा किया है। डीपीआर में बदलाव सांसद की सहमति से होना चाहिए। डीपीआर में बदलाव करने से समय खराब होता है और काम भी बेहतर तरीके से नहीं होता।
—जगदम्बिका पाल, चेयरमैन, स्टैंडिंग कमेटी