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कोरोना का साया: इस साल नहीं भरेगा खलकानी माता का गदर्भ मेला

donkey fair in jaipur : जयपुर के निकट स्थित भावगढ़ बंध्या में शारदीय नवरात्र में भरने वाला एशिया का ख्यातनाम श्री खलकानी माता का गदर्भ मेला इस बार कोरोना के कारण नहीं भरेगा। आयोजकों ने सरकार की ओर से जारी कोरोना एडवाइजरी की पालना में इस साल मेले को रद्द कर दिया है। चार दिन चलने वाले इस गदर्भ मेले में गधे-घोड़े-खच्चरों की खरीद-फरोख्त करने के लिए देशभर से पशुपालक पहुंचते हैं और करोड़ों रुपए का व्यापार करते हैं। लेकिन इस बार ये एतिहासिक मेला कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गया।

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 श्री खलकानी माता का गदर्भ मेला

इस साल नहीं भरेगा खलकानी माता का गदर्भ मेला

जयपुर। जयपुर के निकट स्थित भावगढ़ बंध्या में शारदीय नवरात्र में भरने वाला एशिया का ख्यातनाम श्री खलखाणी माता का गदर्भ मेला इस बार कोरोना के कारण नहीं भरेगा। आयोजकों ने सरकार की ओर से जारी कोरोना एडवाइजरी की पालना में इस साल मेले को रद्द कर दिया है। चार दिन चलने वाले इस गदर्भ मेले में गधे-घोड़े-खच्चरों की खरीद-फरोख्त करने के लिए देशभर से पशुपालक पहुंचते हैं और करोड़ों रुपए का व्यापार करते हैं। लेकिन इस बार ये एतिहासिक मेला कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गया। जानकारों का मानना है छप्पनीया अकाल भी इस मेले को भरने से नहीं रोक पाया था, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण इस बार मेला आयोजित नहीं होगा।

जयपुर नगर निगम की ओर से व खलखाणी माता मानव सेवा संस्थान के सहयोग से प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्र में चार दिवसीय गदर्भ मेले का आयोजन किया जाता है और इस बार यह मेला 23 से 26 अक्टूबर तक आयोजित होना था। मेले में प्रदेश के विभिन्न जिलों से करीब 1500 से 2000 गधे, घोड़े-घोडिय़ां व खच्चर बिकने के लिए आते हैं। संस्थान के अध्यक्ष भगवत सिंह राजावत ने बताया कि प्रदेश में इस समय कोरोना महामारी चरम पर है, ऐसे में मेले का आयोजन करना किसी खतरे से कम नहीं है। महामारी के कारण संस्थान ने मेला आयोजित नहीं करने का निर्णय लिया है।

सेवा संस्थान के संरक्षक ठा. उम्मेद सिंह राजावत ने बताया कि इतिहास में यह पहला मौका है जब इस मेले का आयोजन नहीे होगा। ऐसे में कोरोना के कारण सदियों से चली आ रही परंपरा इस बार टूट जाएगी। पशु पालकों इस मेले का पूरे सालभर इंतजार रहता है। मेले में गुजरात, मध्यप्रदे, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, हिमाचल प्रदेश से व्यापारी गधे-घोड़-खच्चर खरीदने के लिए आते हैं। इसके अलावा मेले में हाट बाजार भी सजता है, जिसमें आस पास के गांवों के लोग खरीदारी के लिए आते हैं।