
लोगों को पसंद आ रही रेत से पत्थर बनने की कहानी
जयपुर। राजस्थान में भी ज्वालामुखी थी। धोक के पेड़ जयपुर की पहचान हैं। क्या पश्चिमी राजस्थान में समुद्र हुआ करता था। ये सवाल उन लोगों के हैं तो विद्याधर नगर से पास बने किशनबाग वानिकी परियोजना में सैर करने जा रहे हैं।
रविवार को सैलानी बड़ी संख्या में पहुंचे। उद्घाटन के बाद यह पहला मौका है कि जब एक दिन में 500 से अधिक लोग किशनबाग पहुंचे हों।
यहां जो भी पहुंच रहा है, वह पत्थरों से लेकर वनस्पतियों के बारे में जानकारी लेते हैं। रेतीली जगह पर विकसित किए इस परियोजना में लकड़ी के वॉक वे से लेकर मचान सैलानियों को पसंद आ रहे हैं।
जेडीए के वन संरक्षक महेश तिवाड़ी की मानें तो पिछले पांच दिनों में 1500 से अधिक लोग सैर कर चुके हैं। रविवार को रिकॉर्ड लोग यहां पर पहुंचे हैं।
गौरतलब है कि सरकार के तीन साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसका उद्घाटन किया था।
खास—खास
—चार साल में इसे जेडीए ने बनाया है। इसमें 12 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए हैं।
—करीब 64 हेक्टेयर जमीन पर इस परियोजना को विकसित किया गया है। मूल स्वरूप इसका बरकरार रखा गया है।
—50 रुपए शुल्क लिया जाता है। इसमें 30 रुपए गाइड के और 20 रूपए प्रवेश के शामिल होते हैं।
बाग में ये है प्रमुख राजस्थानी वनस्पति
खैर, रोंज, कुमठा, अकोल, धोंक, खेजडी, इंद्रोक, हिंगोट, ढाक, कैर, गूंदा, लसोडा, बर्ना, गूलर, फालसा, रोहिडा, दूधी, खेजडी, चूरैल, पीपल, जाल, अडूसा, बुई, वज्रदंती, आंवल, थोर, फोग, सिनाय, खींप, फ्रास आदि प्रजाति के पेड-पौधे है। वहीं लापडा, लाम्प, धामण, चिंकी, मकडो, डाब, करड, सेवण आदि प्रजाति की घास है।
Published on:
26 Dec 2021 03:55 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
