जयपुर

अब सरकार के स्तर पर होगा फैसला, 972 भूखंडों का मामला अधर में

  13 साल बाद आबाद नहीं हो सका ट्रांसपोर्ट नगर  

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Oct 12, 2020


जयपुर. सभी ट्रांसपोर्टर्स को शहर से बाहर शिफ्ट करने की योजना अब तक मूर्तरूप नहीं ले पाई है। कभी जेेडीए की तरफ से ढिलाई रही तो कभी ट्रांसपोर्टर्स ने बाहर जाने में रुचि नहीं दिखाई और नतीजा यह हुआ कि शहर में वाहनों का दबाव बढ़ता रहा है और सीकर रोड पर प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर का पहला चरण 13 वर्ष बीत जाने के बाद भी आबाद नहीं हो पाया। अब, इस पूरे प्रकरण को लेकर जेडीए गंभीर है। फेज-1 और फेज-2 के भूखंड की दरों में 13 गुना से ज्यादा वृद्धि होने से विवाद और बढ़ गया है। फेज-2 को लेकर मंगलवार शाम को नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर बैठक भी होगी। उसमें कोई निर्णय लिया जाएगा।
सोमवार को ट्रांसपोर्टर्स यूनियन के पदाधिकारियों ने जेडीसी गौरव गोयल से मुलाकात की। पदाधिकारियों ने जमीन की दरों में दस गुना बढ़ोतरी करने पर आपत्ति जताई।

कहां किसके स्तर से काम नहीं हुआ
जेडीए:
-कई जगह बिजली लाइन नहीं है। कुछ हिस्सों में जरूर विद्युत पोल लगे हुए हैं।
-पानी की भी दिक्कत है। हालांकि, कुछ इलाकों में ट्यूबवैल चालू किए गए हैं।
-रिजर्व प्राइज पहले 1111 रुपए वर्ग मीटर रखी। इसे बढ़ाकर 13500 रुपए कर दिया। इसके विरोध में ट्रांसपोर्टर्स कोर्ट चले गए।

ट्रांसपोर्टर्स:
-अब तक महज 15 फीसदी ही ट्रांसपोर्ट नगर विकसित हो पाया है। ऐसे में वहां जाकर व्यवसाय करना सुरक्षित नहीं है।
-2007 की लॉटरी का अब तक जेडीए कब्जा नहीं दे पाया है। ऐसे में निर्माण कहां पर करें?
-ट्रांसपोर्ट नगर में सुविधाएं विकसित ही नहीं हैं तो व्यापार कैसे संभव हो पाएगा।


वर्जन...
फेज-2 रिव्यू होना है। मंगलवार को इसको लेकर बैठक होगी। ट्रांसपोर्टर्स की समस्याओं को सुना है। सरकार के स्तर पर ही इसमें कोई निर्णय हो सकेगा। जेडीए की ओर से ट्रांसपोर्ट नगर में सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है।
-गौरव गोयल, जेडीसी

फेज-1 में रिजर्व प्राइज 1111 रुपए प्रति वर्ग मीटर थी। इसे 2017 में बढ़ाकर 13500 रुपए कर दिया, जो न्याय संगत नहीं है। सरकार इसमें राहत दे तो हम बाहर जाने के लिए तैयार हैं।
-अनिल आनंद, अध्यक्ष, जयुपर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन

Published on:
12 Oct 2020 08:53 pm
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