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सात साल के भाई को मौत के मुंह से बचाकर लाई 11 वर्षीय बहन, दिया जीवनदान

एसएसएस अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में भर्ती है दोनों भाई-बहन, मरीज की लाल रक्त कोशिकाएं बनना हो गया था बंद, बहन ने डोनेट किया स्टेम सेल, एसएमएस में पहली बार हुआ प्रत्यारोपण, नया कीर्तिमान

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सात साल के भाई को मौत के मुंह से बचाकर लाई 11 वर्षीय बहन, दिया जीवनदान

देवेन्द्र सिंह राठौड़ / जयपुर। सवाई मानसिंह अस्पताल में 11 वर्षीया बहन ने 7 वर्षीय कैंसर पीडि़त भाई की जिंदगी बचाने के लिए लाल रक्त कोशिकाएं डोनेट की है। चिकित्सकों के अनुसार सवाई मानसिंह अस्पताल में स्टेम सेल प्रत्यारोपण पहली बार हुआ है। यह कीर्तिमान है।

इस संबंध में अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अचल शर्मा ने बताया कि अलवर जिले के आंधी निवासी सात वर्षीय नक्श ब्लड कैंसर बीमारी से ग्रस्त है। वह एसएमएस अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग भर्ती है। मरीज को लाल रक्त कोशिकाएं बनना बंद हो गई थी। उसे एप्लास्टिक एनीमिया कहा जाता है।

इस स्थिति में मरीज को स्टेम सेल प्रत्यारोपण की जरुरत थी। इसके लिए मरीज की बहन नेहा को तैयार किया गया। उसकी आवश्यक जांचे करवाई गई। इसके बाद ट्रोमा सेंटर में ट्रान्सफ्यूजन मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित शर्मा के निर्देशन में नेहा ने भाई के लिए रक्त कोशिकाओं का डोनेशन किया। इसके बाद रक्त कोशिकाओं को मरीज को प्रत्योरोपण की गई।

नि:शुल्क हुआ प्रत्यारोपण
ट्रोमा सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. अनुराग धाकड़ ने बताया कि यह ट्रांसप्लांट राज्य में किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं हुआ है। यह मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना के तहत पूर्णत: नि:शुल्क किया गया जबकि निजी अस्पतालों में इस पर लाखों रुपए खर्च होते है।