
बेटे प्रिंस की याद में स्कूल गेट पर मोमबत्तियां जलाती मां। फोटो: पत्रिका
जयपुर। रक्षाबंधन पर जहां घर-घर खुशियां थीं, वहीं झोटवाडा स्थित महाराणा प्रताप स्कूल के बाहर शुक्रवार शाम को माहौल गमगीन नजर आया। बीते दिनों संदिग्ध परिस्थितियों में पेटीज खाने के बाद जान गंवाने वाले 18 वर्षीय छात्र प्रिंस सोनी का रक्षाबंधन के दिन ही 18वां जन्मदिन था। इस भावुक मौके पर प्रिंस की मां, बहन और स्कूल के सहपाठियों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर 18 मोमबत्तियां जलाकर उसे श्रद्धांजलि दी।
18वें जन्मदिन और रक्षाबंधन के इस संयोग पर उसकी मां और बहन का रो-रोकर बुरा हाल था। श्रद्धांजलि देने पहुंचे प्रिंस की कक्षा के तमाम बच्चे भी अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सके। स्कूल गेट के बाहर जलती 18 मोमबत्तियों के बीच नम आंखों से श्रद्धांजलि देते उसके परिजन व बच्चों का दृश्य बेहद भावुक था।
बता दें कि जयपुर में झोटवाड़ा स्थित महाराणा प्रताप स्कूल में 12वीं कक्षा के छात्र प्रिंस सोनी ने 12 अगस्त को लंच (11 बजे) में स्कूल कैंटीन से पेटीज खाई थी। इसके बाद वह अचेत हो गया और उसे स्कूल के रेस्ट रूम में करीब 45 मिनट रखा गया। स्कूल पहुंचे परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। सीसीटीवी फुटेज में उसके लेटे होने और बाद में अचेत होने की बात सामने आई थी।
इस मामले में छात्र के पिता अमित सोनी ने 13 अगस्त को झोटवाड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए स्कूल प्रबंधन और कर्मचारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया था। छात्र के पिता का कहना था कि यदि समय पर उसे वहां ले जाया जाता और 108 एंबुलेंस को बुला लिया जाता तो प्रिंस की जान बच सकती थी। उन्होंने स्कूल पर वास्तविकता छिपाने का आरोप भी लगाया। इस मामल में पुलिस ने स्कूल संचालक अमित कुमावत और व्यवस्थापक राजेन्द्र कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी।
परिजनों के अनुसार प्रिंस ने अपने दोस्तों के साथ कैंटीन में पेटीज खाई। कुछ दोस्तों ने पेटीज आधी खाने के बाद छोड़ दी, जबकि प्रिंस ने पूरी खाई, उसके बाद प्रिंस ने उल्टी कर दी और कक्षा में पहुंचा और शिक्षक को तबीयत खराब होने की जानकारी दी। इसी दौरान वह कक्षा में ही बेहोश होकर गिर गया था।
छात्र के पिता अमित सोनी ने आरोप लगाया कि घटना बुधवार सुबह 11 बजे हुई थी, लेकिन स्कूल प्रशासन ने उसे तत्काल अस्पताल नहीं पहुंचाया। स्कूल प्रशासन उन्हें फोन करने में समय गंवाने के बजाय प्रिंस को तुरंत पास के अस्पताल ले जाता, तो शायद उनके बेटे की जान बच जाती। स्कूल भेजते समय सपने में भी नहीं सोचा था कि कुछ ही घंटों बाद ऐसी दुखद खबर मिलेगी। परिजन रवि कुमार के अनुसार स्कूल प्रबंधन उन्हें ही फोन कर चार पहिया वाहन लेकर आने के लिए कहता रहा। जब परिजन 11:45 बजे स्कूल पहुंचे, तब प्रिंस को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।
Updated on:
29 Aug 2026 07:47 am
Published on:
29 Aug 2026 07:46 am
