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जयपुर के प्राइवेट कॉलेज में ‘सामूहिक नकल’ का भंडाफोड़, ₹5.50 लाख की थी ‘डील’! कॉलेज संचालक-लेक्चरर समेत 4 अरेस्ट

जयपुर के प्रभा देवी मेमोरियल कॉलेज में RPMC परीक्षा में सामूहिक नकल का भंडाफोड़। 4 आरोपी गिरफ्तार, सेंटर रद्द। जानिए पूरी कहानी।
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जयपुर

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Nakul Devarshi

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Updated: 30 Jun 2026, 12:19 PM IST

Jaipur RPMC Exam Cheating Racket Busted 4 Arrested Kalwar Road

Jaipur RPMC Exam Cheating Racket Busted

जयपुर के कालवाड़ रोड स्थित प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज परीक्षा केंद्र पर राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल (RPMC) की परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल कराने और पेपर लीक की एक बहुत बड़ी साजिश का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस डिस्ट्रिक्ट स्पेशल टीम (DST) की गुप्त कार्रवाई के बाद जब परीक्षा केंद्र पर आम परीक्षार्थियों को पेपर बांटने में जानबूझकर देरी की गई, तो ग्राउंड फ्लोर और ऊपरी मंजिलों के सैकड़ों छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सेंटर पर जमकर तोड़फोड़ और भारी हंगामा किया, जिसके बाद खोराबीसल थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कॉलेज संचालक, उनके भतीजे और झुंझुनूं के एक प्राइवेट कॉलेज के विभागाध्यक्ष (HOD) व लेक्चरर सहित कुल 4 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

₹5.50 लाख की 'डील', ऐसे रची गई थी साजिश!

जयपुर के कालवाड़ रोड स्थित प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज में चल रही राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल (RPMC) की परीक्षा में धांधली की कड़ियाँ बहुत दूर से जुड़ी हुई थीं। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस पूरी साजिश का ताना-बाना झुंझुनूं के एक कॉलेज से बुना गया था। साजिश की मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

कमजोर छात्रों को पास कराने का ठेका: झुंझुनूं के मुकुंदगढ़ में स्थित 'एस. करण कॉलेज' के फर्स्ट ईयर के 45 ऐसे छात्र थे जिनकी पुरानी परीक्षाओं में बैक (Fail) आई हुई थी। इन सभी छात्रों को किसी भी हाल में पास करवाने के लिए जयपुर के परीक्षा केंद्र के प्रबंधकों के साथ कुल ₹5.50 लाख का सौदा तय किया गया था।

पसंदीदा इनविजिलेटर की ड्यूटी: इस सीक्रेट प्लान के तहत तय हुआ था कि इन सभी 45 छात्रों को परीक्षा केंद्र के एक ही कमरे में एक साथ बैठाया जाएगा। वहां उनके मनपसंद इनविजिलेटर (वीक्षक/पर्यवेक्षक) की ड्यूटी लगाई जानी थी, जो खुद छात्रों को परीक्षा का पूरा पेपर हल करवाने यानी सीधे आंसर पढ़वाने वाले थे।

एडवांस पेमेंट का बैंक ट्रांसफर: आरोपियों ने इस अवैध व्यवस्था को सेट करने और परीक्षा केंद्र के स्टाफ को मैनेज करने के लिए एडवांस के तौर पर ₹3.27 लाख की रकम पहले ही कॉलेज प्रबंधन के खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर भी कर दी थी।

दो डायरियों ने खोला पूरा हिसाब-किताब

इस सामूहिक नकल की साजिश को परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले यानी 27 जून को ही अंजाम दिया जा रहा था, लेकिन इसकी भनक जयपुर पुलिस कंट्रोल रूम और डिस्ट्रिक्ट स्पेशल टीम (DST) को लग गई। पुलिस को सीक्रेट इनपुट मिला था कि कालवाड़ रोड के सेंटर पर एक बड़ा स्कैम होने जा रहा है।

सूचना मिलते ही जयपुर पश्चिम जिले की स्पेशल पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से परीक्षा केंद्र के आसपास दबिश दी। पुलिस ने मौके से मुख्य आरोपियों को रंगे हाथों दबोच लिया। तलाशी के दौरान पुलिस के हाथ दो महत्वपूर्ण डायरियाँ लगीं, जिनमें इन सभी 45 छात्रों के नाम, उनके रोल नंबर और ₹5.50 लाख की डील के तहत दिए गए पैसों के लेनदेन का पूरा कच्चा चिट्ठा विधिक रूप से दर्ज था।

जानिए क्यों भड़के छात्र और क्यों हुई तोड़फोड़?

सोमवार को जब परीक्षा का समय शुरू हुआ, तो कॉलेज प्रशासन के संदिग्ध रवैये के कारण माहौल अचानक हिंसक हो गया। परीक्षा केंद्र के ग्राउंड फ्लोर पर बने कमरों में तो स्टाफ ने समय पर प्रश्नपत्र और आंसर शीट वितरित कर दी, लेकिन दूसरी और तीसरी मंजिल पर बैठे परीक्षार्थियों को काफी देर तक पेपर नहीं दिए गए।

जब ऊपर की मंजिलों पर बैठे छात्रों ने परीक्षा समय निकलने को लेकर विरोध जताया और स्टाफ से पूछा, तो उन्हें कोई सही जवाब नहीं मिला। इसी बीच छात्रों को भनक लग गई कि नीचे के कमरों में कुछ चुनिंदा छात्रों को बैठाकर सामूहिक नकल कराई जा रही है और इसी वजह से उनका पेपर रोका गया है।

इस धांधली का पता चलते ही सैकड़ों छात्र आक्रोशित हो गए। वे क्लासरूम से बाहर निकल आए, खिड़की और दरवाजों के शीशे तोड़ दिए, टेबल-कुर्सियां फेंक दीं और परीक्षा केंद्र पर जमकर बवाल काटा।

कॉलेज संचालक-लेक्चरर समेत 4 अरेस्ट

हंगामे और तोड़फोड़ की सूचना पर खोराबीसल थाना पुलिस भारी जाब्ते के साथ मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने पूर्व में मिले इनपुट और मौके के साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल दो अलग-अलग कॉलेजों के 4 मुख्य विधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

रामकृष्ण मंडीवाल (उम्र 27 वर्ष): यह प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज (परीक्षा केंद्र) का मुख्य प्रशासक और संचालक है, जिसने पैसे लेकर अपने सेंटर पर नकल कराने की अनुमति दी थी।

देवकृष्ण मंडीवाल (उम्र 50 वर्ष): यह रामकृष्ण का सगा भतीजा है और कॉलेज के दैनिक मैनेजमेंट व पैसों की डीलिंग से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।

कृष्ण कुमार सैनी (उम्र 27 वर्ष): यह झुंझुनूं के मुकुंदगढ़ स्थित 'एस. करण कॉलेज' के पैरामेडिकल डिपार्टमेंट का विभागाध्यक्ष (HOD) है, जिसने फेल छात्रों से पैसे इकट्ठे कर जयपुर सेंटर से डील फिक्स की थी।

शंकर लाल जाट उर्फ बाजिया (उम्र 27 वर्ष): यह भी 'एस. करण कॉलेज' के पैरामेडिकल व रेडियोलॉजी विभाग में लेक्चरर के पद पर तैनात है और इस पूरी सेटिंग को ग्राउंड पर लागू करवाने का मुख्य आरोपी है।

    RPMC का एक्शन, सेंटर की मान्यता रद्द, परीक्षाएं स्थगित

    जयपुर के इस परीक्षा केंद्र पर इतनी बड़ी अनियमितता और छात्रों के भारी आक्रोश के सामने आने के तुरंत बाद राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल (RPMC) के उच्च अधिकारियों ने एक हाई-लेवल मीटिंग बुलाई और इस पर तत्काल विधिक कड़ा रुख अपनाया है।

    सेंटर ब्लैकलिस्ट: काउंसिल ने प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज की परीक्षा केंद्र की मान्यता को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है और इस संस्थान को आगामी परीक्षाओं के लिए ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    परीक्षाएं स्थगित: इस विशेष परीक्षा केंद्र पर आयोजित होने वाली DCLT, DDT, और DECGT कोर्सेज की सभी परीक्षाओं को आगामी प्रशासनिक आदेश तक पूरी तरह से स्थगित कर दिया गया है।

    मोबाइल चैट की जांच: पकड़े गए चारों आरोपियों को स्थानीय कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। जयपुर पश्चिम पुलिस की साइबर सेल इन आरोपियों के मोबाइल फोन की वॉट्सऐप चैट और बैंक ट्रांजैक्शन डिटेल्स खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह के तार राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल या शिक्षा विभाग के किसी अन्य बड़े अधिकारी से तो नहीं जुड़े हैं।

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