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Sextortion case: जमानती धाराओं में महिलाओं की रिमांड बढ़ाने पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, रिहा करने का दिया आदेश

सेक्सटॉर्शन के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट और एडीजे से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने स्पष्टीकरण में कहा कि आरोपी महिलाओं का रिमांड कैसे बढ़ाया और उन्हें जमानत पर रिहा क्यों नहीं किया।

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जयपुर

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Arvind Rao

Jul 31, 2025

एनआईए कोर्ट का फैसला (Patrika Photo)

एनआईए कोर्ट का फैसला (Patrika Photo)

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने सेक्सटॉर्शन का मामला जमानती माना है। वहीं, इस तरह के एक मामले में जयपुर महानगर-द्वितीय क्षेत्र के न्यायिक मजिस्ट्रेट तथा अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश क्रम-6 के पीठासीन अधिकारी बालकृष्ण कटारा से दो सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा है कि आरोपी महिलाओं का रिमांड कैसे बढ़ाया और उन्हें जमानत पर रिहा क्यों नहीं किया गया? साथ ही इस मामले में आरोपी दोनों महिलाओं को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।


न्यायाधीश अनिल कुमार उपमन ने मीतू पारीक और इंदू वर्मा की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों महिलाओं के खिलाफ जिन धाराओं में मामला दर्ज हुआ, वह जमानतीय अपराध से संबंधित है। न्यायिक मजिस्ट्रेट और एडीजे ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। अधिवक्ता राजेश महर्षि ने कोर्ट से कहा कि याचिकाकर्ताओं को फंसाया गया, ऐसे में जमानत पर रिहा किया जाए।


‘थाने से ही जमानत मिल जानी चाहिए थी’


याचिका में बताया कि जयपुर के चित्रकूट थाने में व्यापारी को झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर रुपए ऐंठने का मामला दर्ज हुआ, जिसमें याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने जिन धाराओं में अपराध प्रमाणित माना वे जमानतीय अपराध से संबंधित हैं। ऐसे में महिलाओं को थाने से ही जमानत पर छोड़ दिया जाना चाहिए था।


इसके बावजूद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने याचिकाकर्ताओं को रिमांड पर भेज दिया और एडीजे क्रम-6 ने जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। केस की ट्रायल पूरी होने में लंबा समय लगने की संभावना है। राज्य सरकार की ओर से कहा कि अपराध प्रमाणित है, जमानत पर रिहा नहीं किया जाए।