
Jaipur SMS Hospital (Patrika Photo)
SMS Hospital: आज हम आपको दिखा रहे हैं राज्य के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल के बाहर का वह सच, जो हर रोज हजारों मरीजों और उनके परिजन को झेलना पड़ता है। पत्रिका रिपोर्टर ने पैदल चलकर हर कदम पर महसूस किया…फुटपाथ पर कब्जा, सड़क पर गाड़ियों का जाम, गंदगी, ठेले और ट्रैफिक की अराजकता।
अस्पताल मरीजों को जिंदगी देने की जगह है, लेकिन बाहर का माहौल बीमारी बांट रहा है। इस रिपोर्ट में अस्पताल तक पहुंचने के रास्ते की कठिनाई, बदहालियों का दर्द और बेबसी की तस्वीर है। पत्रिका रिपोर्टर गिर्राज शर्मा ने तय किया कि अस्पताल के बाहर की असल तस्वीर अपनी आंखों से देखे।
जैसे ही पृथ्वीराज रोड तिराहे से पैदल कदम बढ़ाया, मुश्किलें शुरू हो गईं, कहीं फुटपाथ पर रेलिंग मिली तो कहीं उस पर गाड़ियां और दुकानदारों का कब्जा। कुछ ही मिनटों में समझ आ गया कि अस्पताल के अंदर मरीज जितनी परेशानी झेलते हैं, उससे कहीं ज्यादा मुसीबत तो बाहर की इस अव्यवस्था में छिपी है।
गेट नंबर 3 से गेट नंबर 2 के बीच फुटपाथ का नामोनिशान तक नहीं था। कियोस्क वाले सड़क तक फैल चुके थे। फलों की क्वालिटी खराब थी और कई कियोस्क छोटे-छोटे ढाबों में बदल गए थे, जिनके आसपास गंदगी साफ दिख रही थी। गेट नंबर 2 के सामने एंबुलेंस फंसी खड़ी थी और मरीजों को लोग हाथ पकड़कर सड़क पार करा रहे थे। ठेलों पर जूस और चाय बिक रही थी, जहां मक्खियों-मच्छरों का डेरा था।
दोपहर तीन बजे का समय था। मैंने पृथ्वीराज रोड तिराहे से पैदल चलना शुरू किया। फुटपाथ पर मुश्किल से 20 कदम ही बढ़ा था कि आगे रेलिंग आ गई और मुझे ट्रैफिक से भरी सड़क पर उतरना पड़ा। अभी कुछ ही कदम और चला था कि एक निजी अस्पताल के बाहर तीन एंबुलेंस और एक चौपहिया वाहन फुटपाथ पर खड़े मिले।
आदिनाथ मार्ग पर पहुंचा तो मेडिकल की दुकानों का सिलसिला शुरू हो गया। टूटा हुआ फुटपाथ दुकानदारों ने पूरी तरह घेर रखा था। ‘यहां आओ, यहां आओ’ की आवाजें सुनाई दीं, शायद उन्होंने मुझे भी दवा खरीदने वाला समझ लिया।
लोग हाथों में रिपोर्ट व दवाइयां लिए ट्रैफिक के बीच भाग रहे थे। कहीं रिक्शेवाले खड़े थे, तो कहीं मिनी बसें बीच सड़क ही सवारियां उतार रही थीं। उस पल लगा, यह कोई मुय मार्ग नहीं, बल्कि परेशानियों की मंडी है।
आगे का फुटपाथ डेढ़-दो फीट का ही मिला, जिस पर दुकानदारों ने कब्जा कर रखा था। उसके बाद सड़क पर दोपहिया वाहन खड़े थे। मजबूर होकर लोग वाहनों के बीच से गुजर रहे थे। सड़क पर वाहनों की आवाजाही के लिए मुश्किल से 10-12 फीट जगह बची थी।
थोड़ा आगे बढ़ा तो सामने गेट नंबर 2 दिखाई दिया। ट्रैफिक का शोर, एंबुलेंस की तेज सायरन और वाहनचालकों की मनमानी, सब मिलकर अव्यवस्था की तस्वीर खींच रहे थे। न ट्रैफिक नियमों का पालन, न ही कोई पुलिसकर्मी। गेट के सामने बसें खड़ी होकर सवारियां चढ़ा-उतार रही थीं।
सूचना केंद्र के पास अस्पताल की दीवार के साथ ही गंदगी का आलम दिखा। सड़क पर पानी जमा था और उसमें मच्छर पनप रहे थे। कियोस्क को लोगों ने भोजनालय बना रखा था। सड़क तक टेबल-कुर्सियां रखकर लोग खाना खा रहे थे। गेट नंबर 3 के पास बना बस स्टॉप टूटी कुर्सियों के कारण बेकार पड़ा था। लोग सड़क पर खड़े बस का इंतजार कर रहे थे।
मैंने मेडिकल की दुकान पर खड़े हनुमानगढ़ निवासी जगदीश चौधरी से सवाल किया कि उन्हें क्या दिक्कत दिखती है। उन्होंने तुरंत कहा, ‘भाईजी, जितनी परेशानी अस्पताल के अंदर नहीं, उससे ज्यादा बाहर है। सड़क पर पैदल चलने की जगह तक नहीं मिलती। पांच दिन से यही हालत देख रहा हूं।
फिर ट्रॉमा सेंटर पहुंचा। यहां तो हालात और बदतर थे। फुटपाथ पर लोग खुले में पेशाब कर रहे थे। बदबू से बचने के लिए लोग मुंह पर कपड़ा बांध रहे थे। मिट्टी और गंदगी हर जगह फैली थी। पास में बना बस स्टॉप कब्जे में था और ठेलेवालों ने फुटपाथ पर डेरा डाल रखा था।
प्रश्न: एसएमएस अस्पताल के बाहर कितने अतिक्रमण हैं, क्या निगम ने कभी चिह्नित किए हैं
जवाब: अधिकतर अतिक्रमण अस्थायी होते हैं। हमने पिछले 2 माह में एसएमएस के बाहर 3 बार कार्रवाई की है। कई अतिक्रमण हटाए भी है। लोगों से समझाइश भी कर रहे हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर पाबंदी भी लगा रहे हैं।
प्रश्न: अतिक्रमण न हो, इसके लिए कोई प्लान है क्या?
जवाब: बार-बार अतिक्रमण न हो, इसके लिए हमने गार्ड भी लगाए हैं, जो अतिक्रमण करने वालों को हटाते हैं। लेकिन संसाधनों की कमी के चलते कई बार जरूरत के अनुसार उन गार्डों को दूसरी जगह भेज देते हैं, जिससे अतिक्रमण करने वाले फिर से काबिज हो जाते हैं।
प्रश्न: कुछ लोगों ने स्थायी अतिक्रमण भी कर रखे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की कोई योजना है?
जवाब: अतिक्रमण कैसा भी हो, उसे हटाने की कार्रवाई करेंगे।
Updated on:
22 Aug 2025 02:53 pm
Published on:
22 Aug 2025 11:57 am
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