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Jaipur Accident: बहुत दर्द है… पति और 3 बच्चों की मौत के बाद ICU में जिंदगी से जंग लड़ रही कैलाशी इतना ही कह पाई

Jaipur Trailer Accident: एसएमएस अस्पताल के आईसीयू में बेड पर लेटी कैलाशी की आंखें बहुत कुछ कह रही थीं। दोनों पैरों पर स्टील की रॉड लगाकर स्क्रू लगे हैं। एक हाथ पर मोटी पट्टी बंधी है, हाथ भी टूट चुका है।
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जयपुर

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Anil Prajapat

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ललित तिवारी

Jul 13, 2026

Jaipur trailer accident

एसएमएस अस्पताल में भर्ती कैलाशी। फोटो: पत्रिका

जयपुर। एसएमएस अस्पताल के आईसीयू में बेड पर लेटी कैलाशी की आंखें बहुत कुछ कह रही थीं। दोनों पैरों पर स्टील की रॉड लगाकर स्क्रू लगे हैं। एक हाथ पर मोटी पट्टी बंधी है, हाथ भी टूट चुका है। पट्टी के किनारों से रिसता खून उसकी पीड़ा को और गहरा कर देता है। चेहरे पर दर्द की गहरी लकीरें हैं…। जब उसकी तबीयत पूछी तो उसने बड़ी मुश्किल से आंखें खोलीं। होंठ कांपे और धीमी आवाज में सिर्फ इतना कह पाई…बहुत दर्द है…उस एक वाक्य में सिर्फ शरीर का दर्द नहीं था, बल्कि उस मां का टूट चुका पूरा संसार भी समाया हुआ था, जिसने एक ही पल में अपना परिवार खो दिया।

कोई नहीं कहने वाला कि सब ठीक हो जाएगा…

अजमेर रोड 200 फीट बाइपास पर गत 7 जुलाई को हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने कैलाशी की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। ट्रेलर की टक्कर ने उसके सामने ही उसके पति और तीनों मासूम बेटों को उससे छीन लिया। अब अस्पताल के आईसीयू में मशीनों के बीच जिंदगी की लड़ाई लड़ रही कैलाशी के पास न पति है, न बच्चे और न ही कोई ऐसा अपना, जो उसके सिर पर हाथ फेरकर कह सके कि सब ठीक हो जाएगा।

बस अब दर्द रहता साथ

दिन के समय आईसीयू के बाहर कैलाशी के पास कोई अपना नहीं दिखा। सिर्फ एक महिला उसकी देखभाल में लगी थी। बताया गया कि मानसरोवर में रहने वाले रिश्तेदार शाम को अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन दिन भर कैलाशी का दर्द उसके साथ अकेला रहता है।

हादसे में राजसमंद जिले के जैतपुरा निवासी चन्द्र प्रकाश बागरी की मौत हो गई। उनके साथ 11 वर्षीय बेटा रमेश, 10 वर्षीय गोपाल और 8 वर्षीय दीपक भी हमेशा के लिए इस दुनिया से चले गए। चार अर्थियां एक साथ उठीं तो पूरे गांव और परिचितों की आंखें नम हो गईं। पीछे बची सिर्फ कैलाशी, जो खुद भी मौत से जंग लड़ रही है।

रोज मेहनत करते, सपनों की नहीं थी कमी

चन्द्र प्रकाश वर्षों से जयपुर के वैशाली नगर की झुग्गी बस्ती में परिवार के साथ रहते थे। खजूर की झाड़ू बनाकर बेचते थे। रोज मेहनत करते, ताकि तीनों बेटे पढ़-लिख सकें और परिवार का भविष्य बेहतर बन सके। छोटे-से घर में साधन कम थे, लेकिन सपनों की कोई कमी नहीं थी। उन सपनों को एक तेज रफ्तार ट्रेलर ने कुछ ही सेकंड में कुचल दिया।

एसएमएस अस्पताल के आईसीयू में इस समय सिर्फ एक घायल महिला का इलाज नहीं चल रहा, बल्कि एक टूटे हुए जीवन को बचाने की कोशिश हो रही है। शरीर के जख्म शायद समय के साथ भर जाएंगे, लेकिन पति और तीन मासूम बेटों को खोने का जो घाव कैलाशी के दिल पर लगा है, उसे भरने में शायद पूरी जिंदगी भी कम पड़ जाए।