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Republic Day 2025: जयपुर में यहां मना था पहला गणतंत्र दिवस, स्कूलों में हुआ था उत्सव

Republic Day Celebration In Jaipur: गणतंत्र दिवस को लेकर शहर के बुजुर्गों व प्रबुद्ध लोगों ने पुरानी यादें ताजा करते हुए उस समय के माहौल के साथ उस दौर की परंपराओं को लेकर अनुभव साझा किए।

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76th Republic Day: आज जयपुर शहर में गणतंत्र दिवस पर रोशनी की धूम है। कुछ ऐसे ही आजाद हिंदुस्तान के पहले गणतंत्र दिवस पर शहर को रोशनी से सजाया गया। इस दिन त्रिपोलिया गेट पर पहला गणतंत्र दिवस मनाया गया। सरकारी विभागों में छुट्टी की घोषणा की गई। गणतंत्र दिवस को लेकर शहर के बुजुर्गों व प्रबुद्ध लोगों ने पुरानी यादें ताजा करते हुए उस समय के माहौल के साथ उस दौर की परंपराओं को लेकर अनुभव साझा किए।

रात को होती थीं चुनावी सभाएं

पहले चुनावी सभाएं रात 8 बजे बाद होती थीं, जो रात 12 से एक बजे तक चलती थी। विभिन्न राजनैतिक दलों की ओर से ऐसी सभाएं रामलीला मैदान व त्रिपोलिया गेट के बाहर होती थीं। तब लोग शाम को भोजन करके परिवार के साथ चुनावी सभाएं सुनने जाते थे, उनमें बच्चे भी होते थे। लोगों के लिए दरी बिछा दी जाती थी। चुनावी सभाओं के अलावा नुक्कड़ सभाएं भी होती थीं, जिनमें मेले सा माहौल नजर आता था।

-प्रो. मधुकांता शर्मा, शिक्षाविद व इतिहासकार


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स्कूलों में हुआ था उत्सव

जयपुर में त्रिपोलिया गेट पर पहला गणतंत्र दिवस मनाया गया था। इसमें राजप्रमुख की हैसियत से सवाई मानसिंह द्वितीय ने परेड की सलामी ली और झंडारोहण किया था। उस दौरान 4 हजार 653 कैदियों को जेल से छोड़ा। किसानों के लगान व बकाया माफ किए गए। सरकारी विभागों में छुट्टी की घोषणा की गई। पूरे शहर को रोशनी से सजाया गया। स्कूलों में उत्सव हुए और बच्चों को लड्डू व फल बांटे गए।

-सियाशरण लश्करी, संस्थापक अध्यक्ष जयपुर फाउंडेशन

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तब मोटा अनाज खाते थे, अब खाते हैं गेहूं

आजादी के पहले तक गवर्नमेंट ऑफ जयपुर की ओर से प्रकाशित कैलेंडरों का चलन था। वर्ष 1949 तक का पंचांग भी जयपुर गवर्नमेंट की ओर से ही प्रकाशित किया जाता था। पंचांग तब राज की अनुमति से ही निकलते थे। लोग उसी पर विश्वास भी करते थे। तब वार-त्योहार की तिथि को लेकर कोई विवाद नहीं होता था। आजादी के दौर का समय खास था। पहले अनाज की समस्या थी, गेहूं अमरीका से आता था। लोग जौ, बाजारा व मक्का की रोटियां खाते थे। अब मोटे अनाज के बजाय लोग गेहूं अधिक खाने लगे हैं।

- रामशरण नाटाणी, मिश्र राजाजी का रास्ता