
नाट्य समारोह 'जयरंगम' का समापन
अखिल भारतीय नाट्य समारोह 'जयरंगम' के दसवें संस्करण के तीसरे और अन्तिम दिन रविवार को दिन की शुरुआत मॉर्निंग रागा से हुई। बनारस के तबला वादक निर्मल यदुवंश ने अपने साथी कलाकार की हारमोनियम पर संगत के साथ तबला वादन की प्रस्तुति दी। उसके बाद मध्य प्रदेश मालवा के कालूराम बामनिया ने अपने भाव विभोर कर देने वाली लोक गायन की प्रस्तुति दी। अन्तिम दिन जाने.माने फिल्म अभिनेता और नाट्य लेखक व निर्देशक मकरंद देशपाण्डे के लिखित, निर्देशित और अभिनीत नाटक राम और अजितेश गुप्ता निर्देशित संगीतमय नाटक रेल गाड़ी कैसो न सुन्दरके ऑनलाइन मंचन किए गए।
सिर्फ परिश्रम पर भरोसा : पीयूष मिश्रा
इससे पहले जाने माने रंगकर्मी, अभिनेता पीयूष मिश्रा नाट्य प्रेमियों से रूबरू हुए और दर्शकों के सवालों के जवाब दिए। उनका कहना था कि प्रशिक्षण बहुत जरूरी होता है इससे आपका दिमाग और सोच खुलती है आप बेहतर करते हैं। आप कहीं पर भी रहकर अपने आप को प्रशिक्षण दे सकते हैं और अपना मुकाम हासिल कर सकते हैं जैसे मनोज बाजपेई। उन्होंने अपनी जगह खुद बनाई। एक छात्र के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि बातों से कुछ हासिल नहीं होता सिर्फ परिश्रम पर ही भरोसा करना होता है और आपको घर के सुरक्षा घेरे से बाहर निकलने की कोशिश करनी चाहिए।
किसी काम को करने का उद्देश्य गहरा होना चाहिए .सुनील शानबाग
इसके बाद नाट्य निर्देशक,पटकथा लेखक सुनील शानबाग नाट्य प्रेमियों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि पहले आपके दिमाग में एक पुख्ता आइडिया होना चाहिए। पिछले दस. बारह साल से मैं इसी तरीके से पहले आईडिया क्रिएट करता हूं और उसके बाद नाटक।
जयरंगम की जय पताका ऊंची ही रहेगी .आलोक चटर्जी
रंग प्रशिक्षण के महत्व के बारे में बताते हुए आलोक चटर्जी ने कहा कि यह अभिनेता के विकास के लिए जरूरी है कि उसे इस प्रशिक्षण से गुजर ना चाहिए। आपके पूरे व्यक्तित्व, आपकी आवाज, बॉडी लैंग्वेज का अभ्यास, आपकी कल्पनाशीलता और आपकी एकाग्रता बढ़ाने की प्रक्रिया को ही रंग प्रशिक्षण कहते हैं।
Published on:
19 Dec 2021 07:58 pm
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