5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

एयरपोर्ट, शिक्षा, रंगाई-छपाई से पहचान, पर विकास से कोसों दूर है सांगानेर

सांगानेर विधानसभा क्षेत्र में जन एजेंडा बैठक, नेताओं के सामने जनता ने दिखाया गुस्सा
2 min read
Google source verification
sanganer

एयरपोर्ट, शिक्षा, रंगाई-छपाई से पहचान, पर विकास से कोसों दूर है सांगानेर

जयपुर. इंटरनेशनल एयरपोर्ट होने के साथ ही एजुकेशन हब और रंगाई-छपाई में पहचान बनाने वाला सांगानेर विधानसभा क्षेत्र विकास से कोसों दूर है। चुनाव के दौरान प्रत्याशी क्षेत्र को चमन बनाने की लंबी-चौड़ी घोषणाएं कर जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद दुबारा शक्ल नहीं दिखाते। राजस्थान पत्रिका की ओर से सोमवार को सीतापुरा स्थित जयपुर इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित सांगानेर विधानसभा क्षेत्र की जन एजेंडा बैठक में जनता की कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया सामने आई। बैठक में क्षेत्र में दावेदारी कर रहे कांग्रेस व भाजपा के नेता पहुंचे और लोगों ने उनसे सवाल दागे। बैठक में नेताओं ने अपने मुद्दे रखे, पर लोगों में नेताओं के प्रति रोष दिखाई दिया।

दिखी नाराजगी

लोगों ने विधायक घनश्याम तिवाड़ी के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। लोगों ने कहा कि विधायक ने क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दिया। सड़क से लेकर पानी सहित अन्य समस्याओं से आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं यातायात व्यवस्था भी ठप है।
येे मौजूद : चेंजमेकर अभिषेक शर्मा, चेंजमेकर अमित सैनी, सुरेश मिश्रा, अमित शर्मा, रवीन्द्र शर्मा, संतोष शर्मा, अभिषेक भारद्वाज सहित अन्य नेताओं ने कार्यक्रम मेंं शिरकत की।

यह रखे मुद्दे

कॉलोनियों में सीवरेज लाइन हो

पानी निकासी की उचित व्यवस्था

महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला थाना बनाया जाए

पेयजल के लिए बीसलपुर लाइन से कॉलोनियों को जोड़ा जाए

सरकारी कॉलेज बने

सैटेलाइट अस्पताल की व्यवस्था

बच्चों के खेलने के लिए पार्क हो

मेट्रो को प्रतापनगर कनेक्ट हो

फेक न्यूज फैलाने वालों की जिम्मेदारी तय हो

बै ठक में फेक न्यूज से बचने की जरूरत जताई। मतदाताओं ने इसके पीछे संगठित लोगों के साथ कई दलों की भूमिका की भी आशंका जताई। कहा, सोशल मीडिया की चुनाव में भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन गलत संदेशों से बचने की जरूरत है। ऐसे संदेशों में ना तो कोई तारीख लिखी होती है और ना किसी बड़े स्रोत का कोई हवाला होता है। साथ ही राजनीतिक दलों के स्तर पर भी इसकी जांच एजेंसी तैयार करने और पुलिस, निर्वाचन विभाग स्तर पर भी निगरानी करने की जरूरत जताई। जिसकी संलिप्ता पाई जाती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।