
सूफियाना शाम में जावेद अली ने भरा रंग
जयपुर। 'कहने को जश्न-ए बहारा है, इश्क भी देख के हैरां हैं', 'ओ रे पिया', ' आफरीन आफरीन' जैसे नगमों के साथ गुलाबी नगरी में शनिवार की शाम रंगारंग हुई। मशहूर गायक जावेद अली ने अल्बर्ट हॉल से सुरों की महफिल सजाई तो हर कोई झूमने को मजबूर हो उठा। पहले जहां सीटें खाली थी तो जावेद की एंट्री के साथ ही पूरा कार्यक्रम स्थल हाउसफुल नजर आने लगा। करीब एक घंटे से ज्यादा समय तक जावेद की स्टेज परफॉर्मेंस का पिंकसिटी ने जमकर लुत्फ उठाया। रूमी फाउंडेशन के सहयोग से राजस्थान सरकार के पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित मुजफ्फर अली के जहान-ए-खुसरो मंच पर राजस्थान की एक किंवदंती को पुनर्जीवित करके आध्यात्मिक विचारों को प्रस्तुत किया।
दो दिवसीय कार्यक्रम की शुरूआत 'मूमल: रूह-ए-रेगिस्तान' से हुई, जो मूमल की कालातीत सुंदरता के बारे में राजस्थान की प्रसिद्ध लोककथाओं पर आधारित एक संगीतमय बैले है। मूमल के रूप में शिवानी वर्मा, राणा के रूप में अवेनव मुखर्जी और इस दुखद प्रेम कहानी का वर्णन करने वाले बार्ड के रूप में दास्तानगो अस्करी नकवी ने अपनी शानदारी प्रस्तुति दी।
सूफी महफिल के शुभारंभ में पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह, आरटीडीसी चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़, राजसीको चेयरमैन राजीव अरोड़ा, मुख्य सचिव उषा शर्मा और पर्यटन विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में पर्यटन विभाग की ओर से बनाई गई फिल्म को भी प्रस्तुत किया गया।
'हुमा' के साथ हुआ समापन
उत्सव का समापन 'हुमा' नृत्य बैले के साथ हुआ। मुजफ्फर अली के निर्देशित, शिंजिनी कुलकर्नी और समूह की ओर से प्रस्तुत उड़ते पक्षी की तरह एक अनूठा संगीतमय प्रयास था, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया। रविवार को एक बार फिर सूफी महफिल सजेगी।
Published on:
19 Nov 2022 10:55 pm
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