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7 वर्ष में 17 शिकायतें फिर भी जेडीए 1700 वर्ग मीटर जमीन से नहीं हटा पाया अतिक्रमण

विद्याधर नगर के सेक्टर चार में 1700 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण है। जेडीए वर्ष 2016 में जमीन पर अवैध कब्जा मान चुका है। यह जमीन कॉलोनी के नक्शे में ग्रीन के नाम से छूटी हुई। इसके बाद भी इस जमीन को मुक्त कराने के लिए सात वर्ष कम पड़ गए।

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7 वर्ष में 17 शिकायतें फिर भी जेडीए 1700 वर्ग मीटर जमीन से नहीं हटा पाया अतिक्रमण

7 वर्ष में 17 शिकायतें फिर भी जेडीए 1700 वर्ग मीटर जमीन से नहीं हटा पाया अतिक्रमण

जयपुर. विद्याधर नगर के सेक्टर चार में 1700 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण है। जेडीए वर्ष 2016 में जमीन पर अवैध कब्जा मान चुका है। यह जमीन कॉलोनी के नक्शे में ग्रीन के नाम से छूटी हुई। इसके बाद भी इस जमीन को मुक्त कराने के लिए सात वर्ष कम पड़ गए। जबकि, सेक्टर चार की नागरिक विकास समिति ने इन सात वर्ष में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, जेडीसी, प्रवर्तन शाखा के मुख्य नियंत्रक और जोन उपायुक्त को 17 बार पत्र लिखे। यह जमीन अतिक्रमण मुक्त होती तो इस पर पार्क बनता और आस-पास के हजारों लोगों को इसका फायदा होता।

यह है मामला

-सेक्टर चार के भूखंड संख्या 218, 219, 220, 244, 245, 264, 265 के सामने की रिक्त भूमि है। नक्शे में ग्रीन के नाम से सुरक्षित है। जोन अधिकारियों ने अतिक्रमण की रिपोर्ट तैयार की, उसमें भी लिखा है कि इन भूखंडों के सामने प्लॉट संख्या डी-50, 51 और 52 अवैध हैं।

किसको कितनी बार लिखे समिति ने पत्र

सीएम-02

मुख्य सचिव-01जेडीसी-10

मुख्य नियंत्रक-03

जोन उपायुक्त-01............

निर्माणकर्ता को नोटिस जारी किया था। उसने जवाब पेश किया है। जिसमें सोसाइटी के पट्टे होना बताया है। इस मामले का विधिक परीक्षण जोन से करवाया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

-रघुवीर सैनी, मुख्य नियंत्रक, प्रवर्तन शाखा

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हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर दे दी 18 मीटर की अनुमति

जयपुर. अजमेर रोड, पुरानी चुंगी स्थित मोदी नगर में बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन किया जा रहा है। पहले तीन भूखंडों का नियमानुसार पुनर्गठन करवाया। लेकिन, जब बिल्डिंग की ऊंचाई की बात आई तो हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार करते हुए इमारत को तय मानकों से ऊपर ले जाया जा रहा है। इसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं और जेडीए के अधिकारी कार्रवाई करने से बच रहे हैं।

दरअसल, आवासीय योजनाओं में भूखंडों के पुनर्गठन मामले में हाईकोर्ट ने अधिकतम 15 मीटर ऊंचाई निर्धारित कर रखी है। लेकिन यहां पर जेडीए ने 17.97 मीटर की अनुमति दे दी।

ये भी सता रही चिंता

-स्थानीय लोगों का कहना है कि उक्त इमारत में फ्लैट बन रहे हैं। पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। ऐसे में गाडिय़ां सडक़ पर खड़ी होंगी और लोगों का निकलना मुश्किल हो जाएगा।