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20 वर्ष पुराने पट्टे नहीं मान रहा जेडीए…शिविर निरस्त किया,अब हो रही जांच

-कॉलोनी में जो नए निर्माण हो रहे उनको पुलिस ने रुकवाया

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अश्विनी भदौरिया. जयपुर. प्रशासन शहरों के संग अभियान में मनमानी की जा रही है। स्थिति यह है कि राजधानी में 20 वर्ष पुराने पट्टों को जेडीए के अधिकारी मानने को तैयार नहीं हैं। पुलिस भी कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर रही है। मामला जेडीए जोन आठ की कॉलोनी माता सरस्वती नगर का है। कुछ लोग इस कॉलोनी को महा सरस्वती नगर बता रहे हैं और 12 दिसम्बर को मुहाना मंडी थाने में श्री लक्ष्मी गृह निर्माण सहकारी समिति लिमिटेड के पदाधिकारियों और हरिनारायण सैनी के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया। इधर, जेडीए ने 22 और 23 दिसम्बर को प्रस्तावित माता सरस्वती नगर का नियमन शिविर निरस्त कर दिया। जबकि, इससे पहले जेडीए नियमन शिविर की प्रक्रिया पूरी कर चुका था।दरअसल, प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत राज्य सरकार ने नियमन के लिए जो रियायत दी, उसके आधार पर माता सरस्वती नगर नागरिक विकास समिति, धौलाई ने रिकॉर्ड जमा करवाया। उसी के आधार पर जेडीए ने नियमन प्रक्रिया शुरू की।

ऐसे समझें मामला

वर्ष 1994 में समिति ने अनुबंध के जरिए काश्तकारों से जमीन खरीदी और उस पर माता सरस्वती नगर नाम से कॉलोनी सृजित की। इसके बाद श्री लक्ष्मी गृह निर्माण सहकारी समिति लिमिटेड ने भूखंडों के पट्टे दिए। जिसकी पुष्टि उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां, जयपुर शहर कार्यालय में उक्त समिति के तत्कालीन चुने पदाधिकारियों की सूची उपलब्ध है। उन्हीं ने पट्टे जारी किए हैं।

इसलिए माता सरस्वती नगर का पक्ष मजबूत

-सोसाइटी ने जो पट्टे जारी किए हैं, उन पर उस समय में अध्यक्ष और मंत्री के हस्ताक्षर हैं।

-पत्रिका की टीम ने यथास्थिति देखी तो सामने आया कि यहां वर्षों पुराने निर्माण हैं। कुछ के पास बिजली के कनेक्शन तक हैं।

-जेडीए के संबंधित अधिकारियों ने सर्वे कर कॉलोनी की 90 ए भी करवाई है।

-नियमन को लेकर तीन बार विज्ञप्ति जारी की। एक बार भी किसी की आपत्ति नहीं आई।

-पट्टे कॉलोनी के लोगों ने पेश किए हैं, उन पर वैध पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।

महा सरस्वती का पक्ष इसलिए है कमजोर

-इस कॉलोनी का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।

-जो सूची पेश की जा रही है। उस पर हरिनारायण सैनी के हस्ताक्षर हैं। जो रिकॉर्ड जमा कराने के लिए अधिकृत नहीं है।

-जेडीए की वेबसाइट पर जो सूची अपलोड की गई है उसमें महज 16 भूखंड हैं। जबकि एक अन्य सूची में 83 भूखंड दिखाए गए हैं।

मांगी है रिपोर्ट

कुछ लोगों ने अपनी जमीन पर अवैध रूप से कब्जे का आरोप लगाया था। हमने जेडीए को पत्र लिखा है। वहां से रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी विवाद को रोकने के लिए फिलहाल निर्माण कार्य रुकवा दिया है।

-जय प्रकाश पूनिया, थानाधिकारी मुहाना

खसरों की करवा रहे जांच

सहकारिता शाखा ने जो सूची दी है, वो महा सरस्वती कॉलोनी की है। विकास समिति ने जो सूची दी है वह अलग है। ऐसे में खसरा नम्बरों की जांच करवाई जा रही है। उसके बाद आगे का निर्णय किया जाएगा।

-शेर सिंह लुहाडि़या, उपायुक्त, जोन आठ