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जयपुर में विकास, विवाद और जेडीसी शिखर अग्रवाल को समझिए: इनसे ही मिली सुर्खियां

3 साल पहले दिल्ली से ट्रांसफर होकर अग्रवाल को सरकार जेडीसी बनाकर जयपुर लाई। शुरुआत में ज्यादातर अधिकारी इनसे नावाकिफ थे, लेकिन विकास को लेकर जैसे ही इन्होंने योजनाएं शुरू की तो पूरे शहर में इनकी अलग पहचान बनी.....

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vijay ram

Nov 03, 2016

जयपुर.
राजस्थान में 62 प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले से सियासी गलियारे में तरह-तरह की चर्चा हो रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा बातें जेडीए के प्रमुख शिखर अग्रवाल को लेकर हुईं, जो पद मिलने के समय से ही सुर्खियों में रहे।


करीब तीन साल पहले दिल्ली से ट्रांसफर होकर अग्रवाल को सरकार उन्हें जेडीसी बनाकर जयपुर लाई। शुरुआत में ज्यादातर अधिकारी इनसे नावाकिफ थे, लेकिन शहर के विकास को लेकर जैसे ही इन्होंने योजनाएं शुरू की तो पूरे शहर में इनकी अलग पहचान बनी।


लंबे अरसे से आतंकी पड़ी रिंग रोड परियोजना को शुरू करने का श्रेय शिखर अग्रवाल को ही जाता है। महज 9 दिन के भीतर ही इन्होंने 47 किलोमीटर लंबी रिंग रोड की अवाप्त जमीं का कब्ज़ा लिया और मौके पर काम शुरू करवाया। इसके बाद 2008 से आतंकी पड़ी दुर्गापुरा एलिवेटेड रोड को भी इन्होंने पूरी करवाकर इस पर यातायात शुरू करवाया।


पृथ्वीराज नगर के नियमन कैंप भी अग्रवाल के कार्यकाल में ही शुरू हुए, आज योजना में 20 हज़ार से ज्यादा पट्टे जारी हो चुके हैं। मोके पर कई जगहों पर सड़क भी बन चुकी हैं। इसके अलावा आंबेडकर सर्किल से अजमेर रोड तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड का काम भी जल्द शुरू होन वाला है। इसका लोड टैस्ट पूरा हो चूका है।


अपने इतने लंबे कार्यकाल के दौरान अग्रवाल का विवादों से भी नाता रहा। शहर में सड़कों के बीच आ रहे धार्मिक स्थलों को हटाने को लेकर शिखर अग्रवाल को आरएसएस सहित कई संगठनों के विरोध का सामना करना पड़ा। सरकार पर इन्हें हटाने का दबाव भी बना लेकिन ये नहीं है पाए। इसी तरह शहर के सर्किलों को छोटा करने के मामले में मंत्री राजपाल से भी इनकी ठनी। राजपाल ने बुना अध्य्यन ही सर्किल्स को छोटा करने पर सवाल उठाये, लेकिन ये विवाद भी उन्हें इस सीट से नहीं हटा पाया। हालांकि मंत्री की नाराजग़ी के बाद जेडीए ने जो भी सर्किल हटाये उसका पहले अध्ययन किया गया और सरकार की मंजूरी के बाद ही उसे हटाया गया।


राजमहल पैलेस की जमीन को कब्जे में लेने का विवाद सबसे ज्यादा गहराया। इस पैलेस के अंदर जेडीए की अवाप्त जमीं को कब्जे में लेने की कार्रवाई को लेकर विधायक दिया कुमारी और अग्रवाल के बीच जमकर बहस भी हुई। मामला कोर्ट में भी पहुंचा।


इसके बाद राजपूत समाज एक होकर सड़को पर उतरा ओर जमीन का कब्ज़ा दिलाने, राजमहल के सील लगे गेट खोलने और जेडीसी को हटाने की मांग की। सरकार बैकफुट पर आई और राजमहल की सील खोली गई। इसके बाद इस जमीन पर तारबंदी की लेकर भी विवाद हुआ। लेकिन चली जेडीसी की ही। उनके ट्रांसफर को इसी प्रकरण से जोड़कर देख रहे हैं। हालाँकि यह प्रकरण अगस्त का होने और उन्हें नया पद भी अच्छा देने के कारण ये वजह नगण्य मानी जा रही है।

Read: आखिरकार 34 माह बाद हटाए गए जेडीसी शिखर

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