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पटना हॉस्टल कांड: NEET छात्रा के साथ जहां हुई दरिंदगी उस हॉस्टल का मालिक कौन? 15000 की नौकरी से शुरू कर बनाई करोड़ों की संपत्ति

पटना हॉस्टल कांड अब शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष चंद्रवंशी पर केंद्रित हो गया है, जिसने पांच साल पहले 15,000 रुपये की नौकरी से शुरुआत की थी और अब करोड़ों रुपये की संपत्ति जमा कर ली है। पुलिस उसकी जमीन और प्रॉपर्टी, राजनीतिक कनेक्शन और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। पुलिस हिरासत में उससे पूछताछ के बाद मामले की कई परतें खुलने की उम्मीद है।

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पटना

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Anand Shekhar

Jan 18, 2026

पटना शंभू गर्ल्स हॉस्टल कांड | patna hostel case | Patna NEET Student Death Case

शंभू गर्ल्स हॉस्टल

पटना हॉस्टल कांड: पटना में NEET की तैयारी कर रही जहानाबाद की एक छात्रा के रेप और मर्डर ने बिहार को हिलाकर रख दिया है। पहले तीन दिनों तक पुलिस ने छात्रा की मौत को आत्महत्या बताया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले को पलट दिया। रिपोर्ट में सेक्सुअल असॉल्ट, अत्यधिक चोट और डेढ़ से दो घंटे तक चले संघर्ष के संकेत मिले। जिसके बाद जांच अब पूरी तरह से शंभू गर्ल्स हॉस्टल पर केंद्रित हो गई है, जहां छात्रा बेहोश मिली थी और खासकर हॉस्टल के मालिक मनीष चंद्रवंशी उर्फ ​​मनीष रंजन पर।

हॉस्टल का मालिक मनीष चंद्रवंशी कौन है?

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मनीष मूल रूप से जहानाबाद के मखदूमपुर इलाके का रहने वाला है। 2020 में वह पटना आया और एक प्राइवेट अस्पताल में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी के तौर पर काम करने लगा, जहां उसे 15,000 रुपये महीने की सैलरी मिलती थी। उस समय, उसकी इनकम से मुश्किल से उसके परिवार का खर्च चलता था और उसके नाम पर कोई खास प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड नहीं थी।

लेकिन आज, पांच साल बाद, उसी मनीष के पास पटना में करोड़ों की एक बिल्डिंग है, जिसमें वो लड़कियों का हॉस्टल चलता है। जांच में यह भी पता चला कि जहानाबाद में भी उसके नाम पर जमीन और प्रॉपर्टी है।

कोरोना के समय ऑक्सीजन सिलेंडर की शुरू की थी एजेंसी

पुलिस जांच में पता चला कि नौकरी के दौरान मनीष का कोई और बड़ा बिजनेस नहीं था। हालांकि COVID-19 महामारी के दौरान जब ऑक्सीजन सिलेंडरों की भारी कमी थी, तो मनीष ने एक ऑक्सीजन एजेंसी शुरू की। माना जाता है कि यह उसका पहला बड़ा बिजनेस था।

अब जांच इस बात का पता लगाने पर केंद्रित है कि क्या एजेंसी का सरकारी सप्लाई से कोई संबंध था। क्या मनीष ने बड़े पैमाने पर प्राइवेट अस्पतालों को सिलेंडर सप्लाई किए? सप्लाई किए गए सिलेंडरों के लिए पेमेंट किस चैनल से किया गया और पैसा किन अकाउंट में गया? अगर ऑक्सीजन सरकारी माध्यम से सप्लाई की गई थी, तो टेंडर, लाइसेंस और परमिट की भी जांच की जाएगी। जांच टीम प्राइवेट सप्लाई से जुड़े बिलिंग और बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर ध्यान दे रही है।

विवादित जमीन पर बना हॉस्टल

मनीष अपनी पत्नी और बच्चों के साथ उस बिल्डिंग की ऊपरी मंजिल पर रहता है जहां शंभू गर्ल्स हॉस्टल है। इस स्थिति में, पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या मनीष को छात्रों और स्टाफ की गतिविधियों के बारे में पता था। क्या उसे पता था कि घटना वाले दिन और रात को हॉस्टल में कौन आया और गया। पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि हॉस्टल की बिल्डिंग विवादित जमीन पर बनी थी। पुलिस अब जमीन के दस्तावेज, रजिस्ट्री पेपर और मालिकाना हक के दस्तावेजों की जांच कर रही है।

मनीष के पुराने फाइल जांच रही पुलिस

मनीष के खिलाफ एक पुराना मामला भी मिला है। एक शादी समारोह में जश्न में फायरिंग के दौरान एक युवक को गोली लग गई थी। इस मामले में उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस आपराधिक व्यवहार के पैटर्न को समझने के लिए पुरानी फाइलों की जांच कर रही है।

पुलिस को मनीष के नाम के दो अलग-अलग वोटर आईडी कार्ड मिले हैं। एक जहानाबाद का और दूसरा पटना के कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र का। इससे गंभीर कानूनी सवाल उठते हैं, क्योंकि दो EPIC नंबर होना नियमों के खिलाफ है।

पुलिस की देरी पर भी उठे सवाल

छात्रा की मौत 11 जनवरी को हुई थी, लेकिन पहले चार दिनों तक पुलिस यही कहती रही कि यह आत्महत्या है। परिवार ने रेप का आरोप लगाया, लेकिन पुलिस ने इससे इनकार कर दिया। 13 जनवरी को जब परिवार और स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग की तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई लोगों को हिरासत में ले लिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही पुलिस ने रेप और हत्या की बात मानी और सबूतों से छेड़छाड़ के डर से मनीष को गिरफ्तार कर लिया। अब उसे पूछताछ के लिए रिमांड पर रखा गया है।

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