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संघर्षों में बिता बचपन, फिर भी चेहरे पर न दिखा भाव, बनें ‘ग्रेट कॉमेडियन

शो में जाने से पहले ये अक्सर डिप्रेशन की दवाइयां लिया करते थे जिम कैरी ।

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संघर्षों में बिता बचपन, फिर भी चेहरे पर न दिखा भाव, बनें ‘ग्रेट कॉमेडियन

संघर्षों में बिता बचपन, फिर भी चेहरे पर न दिखा भाव, बनें ‘ग्रेट कॉमेडियन

इनका जन्म 1960 में कनाडा में हुआ था। चार छोटे भाई-बहिनों में ये सबसे छोटे थे। पिता संगीतकार और अकाउंटेंट थे। घर के हालात बहुत अच्छे नहीं थे। पिता जैसे-तैसे घर का खर्च चला रहे थे। इन सबसे बेफ्रिक ये बच्चा सबको हंसाने का काम किया करता था। स्कूल में जब टीचर इन्हें परफॉर्म करने का मौका देती तो यह तरह-तरह के अभिनय कर हंसाया करते थे। स्कूल में सभी इनके अभिनय की प्रशंसा करने लगे थे। जब 10 साल के हुए तो इन्होंने कैरल ब्रूनेट शो की अभिनेत्री को अपना रिज्यूमे पोस्ट कर बताया कि वे एक बेहतरीन अभिनेता हैं। शो से जवाब आने के बाद बेहद खुश हुए। कुछ समय बाद परिवार दूसरे शहर में शिफ्ट हो गया, जहां से इन्होंने हाई स्कूल पूरा किया। हालांकि परिवार अभी भी आर्थिक तंगी से जुझ रहा था। परिवार की मदद के लिए अब ये अपने भाई के साथ उस फैक्ट्री में आठ घंटे चौकीदार की नौकरी करने लगे थे, जिसमें पिता भी काम किया करते थे। अपने 16वें जन्मदिन के बाद इन्होंने स्कूल छोड़ दिया और एक कॉमेडियन के रूप में परफॉर्म करने लगे। साथ ही फैक्ट्री का काम भी करते रहे। कुछ समय बाद परिवार बेघर हो गया और सभी एक वैन में रहने लगे।
टीवी और फिल्मों की तरफ किया रुख
इसी दौरान ये ‘सैटरडे नाइट लाइव’ के कास्ट मेंबर के लिए ऑडिशन देने चले गए लेकिन इन्हें शो में रिजेक्ट कर दिया गया। इससे ये निराश नहीं हुए और फिर से प्रयास किया। 1982 में टीवी पर आने वाले स्टैंड अप शो ‘ऐन इवनिंग एट द इम्प्रॉव’ में दिखने लगे। इसके एक साल बाद ही ये बड़े शो ‘द टुनाइट शो’ में आ गए। इसके बाद इन्होंने कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा। 1984 में इन्होंने ‘द डक फैक्ट्री’ में काम किया। 1990 से 1994 तक वे ‘इन लिविंग कलर’ के सदस्य रहे। 1994 में इन्होंने ‘एस वेंचुरा पेट डिटेक्टिव’, ‘द मास्क’ और ‘डब एंड डंबर’ जैसी बेहतरीन फिल्मों में मुख्य किरदार निभाया। ‘द मास्क’ के लिए इन्हें अपना पहला गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड मिला। 1996 में इन्होंने सैटरेड नाइट लाइव शो को होस्ट किया, यह वही शो था, जिसके लिए इन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था। अब ये एक से एक हिट फिल्म दे रहे थे। 1998 में ‘द ट्रूमैन शो’ और इसके बाद इन्होंने ‘मैन ऑन द मून’ शो किया। इस शो में इस बार ये कॉमेडियन नहीं बनें, बल्कि एक गंभीर किरदार निभाकर यह साबित कर दिया कि वे बहुआयामी प्रतिभा के धनी हैं। ये हॉलीवुड एक्टर और कॉमेडियन जिम कैरी हैं। हालांकि व्यक्तिगत जीवन में इन्होंने डिप्रेशन का भी सामना किया लेकिन इसकी छलक इनके शो में कभी नहीं दिखाई दी। जिस तरह से बचपन बिता और कम उम्र में ही पैसे कमाने की जिम्मेदारी आ गई थी, इसने कई इच्छाओं का भी दम घोंटा था। यही सभी चीजें इन्हें गहरे अवसाद की ओर ले गई थी। शो में जाने से पहले ये अक्सर डिप्रेशन की दवाइयां लिया करते थे। लेकिन जल्द ही ये समय गई कि दवाइयों के साथ जीना मुश्किल है और इस तरह व्यक्तिगत जीवन पर भी विजय पा लीं।