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जेकेके: राष्ट्रीय पंचतत्व महोत्सव -नाट्य बैले के जरिए जाहिर किए पर्यावरण प्रदूषण के संकट

संस्कृति मंत्रालय, जवाहर कला केंद्र एवं ओरियन ग्रीन्स जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय पंचतत्व महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव के पहले दिन मंगलवार को ‘जीवन धारा’ नाट्य बैले की प्रस्तुति दी गई।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Nov 01, 2022

जेकेके: राष्ट्रीय पंचतत्व महोत्सव -नाट्य बैले के जरिए जाहिर किए पर्यावरण प्रदूषण के संकट

जेकेके: राष्ट्रीय पंचतत्व महोत्सव -नाट्य बैले के जरिए जाहिर किए पर्यावरण प्रदूषण के संकट

जयपुर. संस्कृति मंत्रालय, जवाहर कला केंद्र एवं ओरियन ग्रीन्स जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय पंचतत्व महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव के पहले दिन मंगलवार को ‘जीवन धारा’ नाट्य बैले की प्रस्तुति दी गई। इसमें भोपाल से आए 14 कलाकारों ने पर्यावरण प्रदूषण से पशु-पक्षियों के सामने पैदा हुए संकट को रंगायन सभागार के मंच पर जाहिर किया। डॉ. अंजना पुरी की कहानी में दर्शाया गया कि मनुष्य जीवन का अस्तित्व प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता, वन्य जीवों और पारिस्थितिकीय संतुलन के बिना संभव नहीं है और भूमण्डलीय तापमान वृद्धि से जीवन शैली बदल गई है। दुर्भाग्य से मनुष्य सबसे बड़ा पर्यावरण प्रदूषक बन गया। इससे वन्य प्राणियों-परिंदो के जीवन पर संकट आ गया। कार्यक्रम में दर्शकों को पद्मश्री शशधर आचार्य के निर्देशन में तैयार प्रस्तुति में छऊ व इंडियन बैले का सम्मिश्रण देखने को मिला।

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चलो चलो रे उड चलो रे...

ओरायन ग्रीन्स की नीता उपाध्याय ने बताया कि प्रस्तुत बैले ‘जीवन धारा’ में चिडिय़ों के पर्यावर्णीय संकट की समस्याओं को बताया गया। चिडिया भी गांव से शहर की ओर आती है, क्योंकि यहां सहजता से बिखरे दाने उन्हें मिल जाते है, वहीं गांव में पेस्टिसाइड के छिडकाव से तैयार अनाज की फलियों के सहारे जीवन काटना मुश्किल हो रहा है। उन्हें शहर आकर अहसास होता है कि यहां का प्रदूषित माहौल तो इंसानों के लिए भी अनुकूल नहीं है। वे ‘चलो चलो रे उड चलो रे’ कहते हुए अपने प्राकृतिक वातावरण की ओर लौट आती है और समाज के सामने प्रश्न छोडते है कि...क्या यही तुम्हारी जीवन धारा है?