
Vasudev Israni Murder Case
जोधपुर में 17 सितम्बर को व्यवसायी वासुदेव इसरानी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसरानी को रंगदारी के लिए अपराधी लगातार धमकी दे रहे थे। इसकी सूचना इसरानी ने पुलिस को दे भी दी थी। पुलिस सुरक्षा मिलने के बावजूद इसरानी की हत्या से जोधपुर में जनाक्रोश बढ़ गया था और परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया था। हत्या में लॉरेंस गैंग का हाथ होने के बाद यह भी साफ हो गया कि जोधपुर में कई गिरोह सक्रिय हैं।
पहली बार हुआ ऐसा
आनंदपाल का मामला हो या अन्य गैंग। प्रदेश में जब भी अपराधी हावी नजर आए, एसओजी और स्थानीय पुलिस ने टीम भावना से काम किया है। ऐसे में कुख्यात अपराधी पकड़े भी गए हैं। ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है जब स्थानीय पुलिस अन्य टीम के साथ काम करने के लिए तैयार नहीं हुई।
एसओजी इसलिए जरूरी
जोधपुर में व्यापारी की हत्या के मामले में पुलिस ने दो अभियुक्तों को नामजद किया है। इनमें शामिल काली शूटर को एसओजी पहले से तलाश रही है। सीकर में हुए हत्या के मामले में उसकी तलाश है। एसओजी के पास उसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां हैं। आनंदपाल मामले के कारण एसओजी के पास कई गैंग के नेटवर्क की जानकारी भी है, जो इस मामले में उपयोगी साबित हो सकती है।
18 की रात को गई थी टीम
पुलिस की विफलता के मद्देनजर पुलिस महानिदेशक अजीत सिंह ने 18 सितम्बर को एसओजी को मामले की पड़ताल के आदेश दिए थे। इस पर एडीजी उमेश मिश्रा व आईजी दिनेश एमएन पूरे लवाजमे के साथ उसी रात जोधपुर पहुंच गए। जोधपुर पुलिस कमिश्नर सहित स्थानीय अधिकारी उनके इंतजार में भी थे लेकिन एसओजी ने ज्यों-ज्यों तफ्तीश आगे बढ़ाई, पुलिस असहज होने लगी।
नहीं सुहाई अगुवाई
सूत्रों के मुताबिक जोधपुर पुलिस इस बात के लिए तैयार नहीं हुई कि तफ्तीश की अगुवाई एसओजी करे। एसओजी के अधिकारियों को संदेश पहुंचा दिया कि वे सीधे किसी मामले को डील नहीं कर सकते। इसके लिए सक्षम स्तर की इजाजत जरूरी होगी। एसओजी को न सीसीटीवी देखने दिए गए, न जरूरी दस्तावेज सौंपे गए। स्थितियां ऐसी उपजा दी गईं कि तीन दिन बाद गुरुवार रात ही एसओजी टीम जयपुर लौट आई।
हत्या की तफ्तीश कमिश्नरेट पुलिस के पास है। एसओजी आई भी अपनी मर्जी से थी, गई भी अपनी मर्जी से है।
अशोक राठौड़, पुलिस कमिश्नर, जोधपुर
Published on:
24 Sept 2017 03:45 pm

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