डॉ. सम्पूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के अधीन मथुरादास माथुर अस्पताल में सतत् चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को पहली बार दूरबीन यानी एण्डोस्कोपिक न्यूरो सर्जरी हुई। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान एम्स दिल्ली के न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. बीएस शर्मा और डॉ. दतारा सांवरकर के नेतृत्व में दो मरीजों की सर्जरी की गई।
फल विक्रेता हेमसिंह (42) की पीयूष ग्रंथि में ट्यूमर था। सोमवार सुबह सबसे पहले एण्डोस्कोप की सहायता से हेमसिंह का ट्यूमर निकाला गया। हेमसिंह को कुछ समय पहले सिरदर्द और आंखों की रोशनी कम होने की शिकायत पर डॉक्टरों ने एमआरआई कराई थी, जिसमें ट्यूमर का पता चला।
अब तक अस्पताल में इस तरह की सर्जरी खोपड़ी को खोलकर मस्तिष्क को हटाकर करते थे। इसमें मस्तिष्क के चोट लगने का खतरा रहता था। दूरबीन सर्जरी में एण्डोस्कोप को नाक के जरिए मस्तिष्क तक पहुंचाया गया।

दूसरी सर्जरी बीरबल की हुई जो स्लिप डिस्क से परेशान था। उसकी एल-4 और एल-5 डिस्क में अतिवृद्धि के कारण तंत्रिका पर दबाव पड़ रहा था। बीरबल की पीछ के पीछे 1.8 सेंटीमीटर का छेदकर उसमें एण्डोस्कोप डाला गया और अतिवृद्धि को काटकर तंत्रिका को सुचारू कर दिया गया।
वर्तमान में स्लिप डिस्क सर्जरी में पीठ पर चीरा लगाकर की जाती है। सर्जरी में अस्पताल के न्यूरो सर्जन विभागाध्यक्ष व अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुनील गर्ग और डॉ. शरद थानवी ने भी भाग लिया।