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नाटक में ‘मंटो’ की जीवनयात्रा

. राजस्थान उर्दू अकादमी की ओर से दो दिवसीय उर्दू ड्रामा फेस्टिवल का समापन . साबिर खान के निर्देशन में नाटक 'मंटो हाजिर हो' का मंचन

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Mar 14, 2021

नाटक में 'मंटो' की जीवनयात्रा

नाटक में 'मंटो' की जीवनयात्रा

जवाहर कला केन्द्र (jahawar kala kendra) के रंगायन सभागार में राजस्थान उर्दू अकादमी (rajasthan urdu academy) की ओर से आयोजित दो दिवसीय उर्दू ड्रामा फेस्टिवल (Urdu drama fest) का समापन रविवार को हुआ। वरिष्ठ नाट्य निर्देशक साबिर खान के निर्देशन में खेले गए नाटक 'मंटो हाजिर हो' के जरिए कलाकारों ने मंटो के जीवन संघर्ष को बयां किया। उन पर भारत और पाकिस्तान में चले मुकदमों को जिक्र करते हुए अभिव्यक्ति और आम लोगों के जीवन से जुड़ी समस्याओं पर सवाल उठाए गए। साबिर खान ने बताया कि सआदत हसन मंटो भारतीय उपमहाद्वीप में साहित्य के सबसे विवादास्पद कथाकार हुए हैं। उनका समस्त लेखन गरीब, असहाय, शोषित, सामाजिक उत्पीडऩ, साम्प्रदायिकता के शिकार वर्ग पर आधारित है। नाटक के कथाकन के जरिए उन्होंने समाज की ओर से गरीब महिलाओं के देह शोषण व उनको जीवन यापन के लिए देह व्यापार करने और गलत फैसले लेने को मजबूर करने वाले मुद्दों को उठाया जाता रहा है। ऐसे विषयों पर उन्होंने लिखा और साहित्यकारों के कुछ वर्ग ने उन्हें अश्लील साहित्यकार भी कहा। पांच कहानियों पर अदालतों में मुकदमें चलेख् इनमें तीन भारत में शामिल हैं। वे बटवारे के बाद मंटो पाकिस्तान चले गए और वहां भी दो मुकदमे लगा दिए गए। सभी मुकदमों पर वे बरी हुए।
नाटक में दिखाया गया कि मंटो बचपन में अपने पिता की उपेक्षा का शिकार रहे, जिसका उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पडा। इसके चलते उन्होंने विरोध, अराजकता के जीवन पर पडऩे वाले प्रभावों पर लिखना शुरू किया। मंटो को मुम्बई से भी बड़ा प्रेम था, अपने खुद के बारे में मंटो ने कहा कि मैं चलता फिरता बम्बई हूं। बटवारे के समय फैली साम्प्रदायिक घृणा ने पहली बार उनको अहसास करवाया कि साहित्यकार, कथाकार, फिल्मलेखक के अलावा उनको कोई नहीं पहचानता है। इसके चलते मजबूरी में उन्होंने बुझे दिल से भारत को छोड़ा।
नाटक में आरिफ खान, राहुल स्वामी, पंकज चौहान, आयुषी दीक्षित, रिचा भागचंदानी, साहिल आहूजा, सचिन सौकरिया,जितेन्द्र, सचिन, वैभव शर्मा, पंकज शर्मा, महिपाल ने अभिनय किया। कॉस्ट्यूम रोशन आरा, लाइटिंग गगन मिश्रा और मंच मैनेजमेंट उज्जवल मिश्रा का रहा।


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