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जब जगजीत बोले उसकी गली ले चल यारा

तीन दिसंबर 1995 की सुबह एक कार शहर की गलियों में धीमे-धीमे घूम रही थी। गाड़ी में पीछे की सीट पर बैठे एक व्यक्ति गुनगुना रहे थे।

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तीन दिसंबर 1995 की सुबह एक कार शहर की गलियों में धीमे-धीमे घूम रही थी। गाड़ी में पीछे की सीट पर बैठे एक व्यक्ति गुनगुना रहे थे। आज फिर उनसे सामना होगा, तमन्ना फिर से मचल जाए कि तुम फिर मिलने आ जाओ। वो इनसान थे महान गजल सम्राट जगजीत सिंह। करीब 55 साल के जगजीत जब अपनी जन्म भूमि पहुंचे तो अपने जवानी के दिनों को यादकर भावुक हो गए थे। स्कूल टाइम के अपने पहले प्यार को कभी न भुला पाने के कारण यहां आते ही फिर जवान हो गए। उस दिन वे अपनी जन्मभूमि पर कार्यक्रम देने आए थे। इसी दिन बिना किसी को सूचना दिए वह अपने बचपन के दिनों को याद करने अपने अजीज दोस्त एस प्रकाश के साथ निकल पड़े थे। राष्ट्रीय कला मंदिर के डॉ. कृष्णकुमार आशु ने बताया कि एस प्रकाश के आग्रह के कारण ही जगजीत सिंह यहां कार्यक्रम देने आए थे। उन्होंने इस यात्रा के बारे में बताया था कि तीन दिसंबर की सुबह ही जगजीत सिंह गंगानगर पहुंच गए थे। शहर घूमने के दौरान गाड़ी में ही बगल में बैठे एस प्रकाश से कहा कि मुझे उसकी गली ले चल यारा। उनके इस आग्रह पर एस प्रकाश चौंक पड़े और बोले ये आप क्या कह रहे हैं। अब वे कौनसा यहां होंगी। इस पर जगजीत सिंह ने एस प्रकाश को हसते हुए कहा, हां ये बात भी सही है, मैं भी बूढ़ा हो गया हूं तो वो कौनसा यहां होंगी। बैठी होगी अपने ससुराल में। इसके बावजूद वे अपने स्कूल टाइम की प्रेम की गली से होकर गुजरे। उन्होंने इस एहसास को खूब आनंद के साथ जीया।
उन्होंने कार की खिड़की के शीशे के अंदर से ही अपनी पहली मोहब्बत के आशियाने को निहारा। उस दौरान वे भावुक भी हो गए थे। इस बात का आज तक किसी को पता तक नहीं है कि उनकी पहली मोहब्बत कौन थी और कहां रहती थी।
सत्रह की उम्र में पनपा
था पहला प्यार
एस प्रकाश के अनुसार जगजीत सिंह ने यहां खालसा स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। उसके बाद सरकारी कॉलेज में भी प्रवेश लिया। उनका पहला प्यार स्कूल टाइम में ही परवान चढ़ा था। तब वे लगभग 17 साल के थे। हालांकि बाद में जगजीत सिंह को शहर छोड़कर जाना पड़ा। अपने शहर जब वे करीब 38 साल बाद लौटे तब अपनी पहली मोहब्बत की यादों में डूब गए।
एस प्रकाश गजल सम्राट के गहरे मित्रों में से एक हैं। वे अब करीब 87 साल के हैं और दिल्ली में अपने छोटे बेटे के साथ रहते हैं। उन्होंने ही राष्ट्रीय कला मंदिर की नींव रखी थी। उनको संगीत का बड़ा शौक था। उनके गंगानगर में ब्लॉक एरिया स्थित आवास पर ही रोजाना महफिल लगती थी। इसमें जगजीत सिंह सबको गीत और गजलें सुनाया करते थे।