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राहुल गांधी मामले में दबाव में है न्याय पालिका, अब सुप्रीम कोर्ट से उम्मीदः डांगी

कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने कहा, केंद्र सरकार नहीं चाहती कि देश के ज्वलंत मुद्दों की चर्चा संसद में हो

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जयपुर। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी का कहना है कि राहुल गांधी के मामले में न्यायपालिका पर दबाव है। केंद्र सरकार नहीं चाहती है कि देश के ज्वलंत मुद्दों पर संसद में चर्चा हो। विधानसभा चुनाव, पेपर लीक मामला, कांग्रेस गुटबाजी सहित कई अन्य मुद्दों पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने राजस्थान पत्रिका से खास बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंशः


सवाल- क्या कांग्रेस में सबकुछ ऑल इज वेल है?

जवाब- बिल्कुल कांग्रेस में सबकुछ ठीक है, दिल्ली में पार्टी नेताओं की हुई बैठक में भी हाईकमान ने स्पष्ट संदेश दिया था कि सब एकजुट रहे तो ही सरकार पुनः रिपीट हो सकती है। इसी एकजुटता का परिचय हमने भारत जोड़ो यात्रा में भी दिया था, हाईकमान के आदेश सर्वोपरि है, सब मिलकर चुनाव लड़ेंगे जिससे कांग्रेस की कांग्रेस की सरकार पुनः बने।


सवाल- प्रदेश में पेपर लीक और भ्रष्टाचार बड़े मुद्दे हैं, इसका असर पड़ेगा?


जवाब- पेपरलीक को लेकर सरकार गंभीर है।विधानसभा सत्र में भी राज्य सरकार इस संबंध में संशोधन विधेयक लेकर आ रही है, जिसमें उम्रकैद की सजा का प्रावधान होगा। जहां तक आरपीएससी को भंग करने का मामला है तो इसे भंग करने का अधिकार राज्य के पास नहीं बल्कि केंद्र के पास है।


सवाल- कांग्रेस कह रही है कि न्याय पालिका दबाव में है?


जवाब-राहुल गांधी के मामले में जिस गति से निर्णय हो रहे हैं उससे तो यही लगता है कि न्याय पालिका दबाव में काम रही है। आनन-फानन में जिस तरह से उनका पक्ष जाने बगैर उनकी संसद सदस्यता समाप्त कर दी गई है, उससे भी सवाल खड़े होते हैं। जो भगोड़े इस देश की संपत्ति को लूटकर लेकर चले गए उन पर सवाल खड़े करने वाले व्यक्ति को ही कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। अब हमें सर्वोच्च न्यायालय से उम्मीद है।

सवाल-महंगाई-बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर संसद में चर्चा क्यों नहीं करता विपक्ष ?

जवाब-केंद्र सरकार ज्वंलत मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के कई तरह के हथकंडे अपनाती है। विपक्ष ने अडानी समूह मामला, भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी पर चर्चा कराने की मांग की थी लेकिन एक व्यक्ति के लिए पूरे संसद सत्र को नहीं चलने दिया और विपक्ष पर ही संसद नहीं चलने के आरोप लगा दिए। केंद्र सरकार नहीं चाहती कि देश के ज्वलंत मुद्दों पर संसद में चर्चा हो।


सवाल- आपको एआईसीसी में पद मिलने की चर्चाएं हैं?

जवाब- प्रदेश युवा कांग्रेस का अध्यक्ष रहा, पीसीसी का महासचिव रहा, कर्नाटक चुनाव में स्क्रीनिंग कमेटी का सदस्य रहा, जो जिम्मेदारी दी है, उसे निभाया है। आगे भी पार्टी कोई जिम्मेदारी देगी तो उसे बेखूबी निभाने का प्रयास करूंगा।

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