
जंगल-जंगल बात चली है पता चला है
जयपुर. राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर, गढ़-किलों के साथ अब वन विभाग के पर्यटन स्थल भी सैलानियों को लुभाने लगे हैं। हर साल लाखों सैलानी यहां घूमने आ रहे हैं। रणथम्भौर, सरिस्का, जयपुर चिडिय़ाघर, नाहरगढ़ जैविक उद्यान, झालाना सफारी आदि नए पर्यटन स्थल के तौर पर उभर कर सामने आए हैं।
वन विभाग के अनुसार प्रतिदिन हजारों लोग जंगल की खूबसूरती और वन्यजीवों को निहारने आ रहे हैं। दिसंबर-जनवरी में पर्यटकों की खास रौनक रहती है। यहां तक कि कई बार तो 'हाउस फुलÓ की स्थिति रहती है और सैलानियों को जंगल घूमने के लिए भी सिफारिशें करवानी पड़ती हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि विभाग को ऐसे स्थानों पर मूलभूत सुविधाओं में इजाफा करने की जरूरत है। सैलानियों को क ई जगह परेशानी हो रही है।
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जयपुर ने बनाई अलग पहचान
गुलाबी नगरी जहां विरासत के लिए पहचाना जाता है, वहीं अब लॉयन सफारी, झालाना लेपर्ड सफारी, एलिफेंट सफारी ने भी नई पहचान दी है। जल्द टाइगर सफारी भी शुरू होने वाली है। देश में जयपुर ऐसा शहर है, जहां एकसाथ इतनी सफारी की सुविधा है। जैविक उद्यान व चिडिय़ाघर में भी अन्य स्थानों के मुकाबले सर्वाधिक सैलानी आते है। जल्द ही एग्जोटिक पार्क भी शुरू हो जाएगा। वहां पर्यटकों को दरयाई घोड़ा, जिराफ देखने को मिलेंगे। प्रदेश में यह आकर्षण पहली बार होगा। रणथम्भौर नेशनल पार्क तो दुनिया में खास आकर्षण बन रहा है। देश-विदेश की कई हस्तियां यहां बाघ देखने पहुंची हैं।
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जल्द मिलेगी सौगात
लेपर्ड प्रोजेक्ट के रूप में तैयार होने वाले आठ रिजर्व क्षेत्र नई सौगात के तौर पर उभर कर आएंगे। इनमें झालाना जंगल शुरू हो चुका है। जयपुर में नाहरगढ़ टाइगर सफारी, जोड़-बीड़ बीकानेर और सोरसन में गोडावन प्रजनन केंद्र पर भी काम चल रहा है।
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सालाना सैलानियों की संख्या
- जयपुर चिडिय़ाघर : 06 लाख
- नाहरगढ़ जैविक उद्यान : 04 लाख से अधिक
- जोधपुर का माचिया जैविक उद्यान : 03 लाख से अधिक
- उदयपुर का सज्जनगढ़ जैविक उद्यान : 03 लाख से अधिक
- रणथम्भौर नेशनल पार्क : 3.8 लाख से अधिक
- केवलादेव अभयारण्य : 1.5 लाख से अधिक
- झालाना सफारी : 18 हजार से अधिक
(आंकड़े वन विभाग के अनुसार)
Published on:
24 Oct 2019 04:57 pm
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