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स्कूल में प्रताडऩा से परेशान आखिर फंदे से झूल गया ‘आदित्य‘, मां-बाप की था इकलौती सन्तान

मौसा आईएएस अफसर, लड़ रहे न्याय की लड़ाई...

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जयपुर

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Dinesh Saini

Nov 16, 2017

Student Suicide

जयपुर। नित्यानंदनगर के रीबस स्कूल की प्रियंका (9) की मौत का मामला सुलझा भी नहीं था कि अब जेवीपी इंटरनेशनल स्कूल के छात्र आदित्यकुमार भारती के आत्महत्या का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक बच्चा उसे परेशान करता था। जब भी शिकायत की, टीचर्स ने उलटे उसी को डांटा-पीटा। मां-बाप की इकलौती सन्तान आदित्य ने आखिर आत्महत्या कर ली। आदित्य के मौसा आईएएस अधिकारी एसएस साहोता ने बताया कि प्रतापनगर निवासी आदित्य 11वीं कक्षा में पढ़ता था। परिजनों ने इसी साल दाखिला कराया था। दूसरे छात्र से विवाद बढऩे पर मैं खुद सितम्बर में स्कूल गया, लेकिन उस बच्चे के पिता नहीं आए। वहां विवाद पर बात की बजाय बाहरी मामलों पर चर्चा शुरू कर दी गई।


स्कूल जाने से मना किया, उसी दिन कर ली आत्महत्या...
मौसा साहोता ने बताया, 6 सितम्बर को स्कूल में आदित्य का संबंधित छात्र से विवाद हुआ था। उसने आदित्य के साथ मारपीट की थी। आदित्य पर स्कूल से लौटते समय हमले का प्रयास भी किया गया। उसका स्कूल प्रोजेक्ट भी तोड़ दिया गया। शिकायत करने पर आरोपित छात्र को पाबंद करने की बजाय टीचर्स ने उलटे आदित्य को ही धमकाया। फिर 13 सितम्बर को दोनों के अभिभावकों को बुलाया गया लेकिन आरोपित छात्र के पिता नहीं आए। पिछले शुक्रवार को स्कूल से लौटकर आदित्य ने अगले दिन स्कूल जाने से मना कर दिया था। उसे दिन उसने आत्महत्या कर ली।

स्कूल ने शिकायत डिलीट की...
साहोता ने बताया कि उन्होंने तथ्यों के साथ शिकायत स्कूल के फेसबुक पेज पर डाली लेकिन स्कूल प्रबंधन ने डिलीट कर दी। आदित्य की मौत से पिता मुकेशकुमार और मां भारती मिठोलिया पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पांच दिन बाद भी वे कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं। मुकेश ने सांगानेर थाने में शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की।

होनहार था आदित्य
साहोता ने बताया कि आदित्य होनहार छात्र था। मैथ्स ओलम्पियाड में उसने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया था। माता-पिता की इकलौती सन्तान आदित्य गत 10 नवम्बर को फंदे से झूल गया। उसे उतारकर अस्पताल पंहुचाया लेकिन बचाया नहीं जा सका।

बच्चों के बीच झगड़े की यह पहली घटना नहीं है, हर स्कूल में ऐसी स्थितियां बनती रही हैं। बच्चों की आपसी और छोटी सी बात पर बाहरी लोगों का मारपीट के लिए पहुंच जाना भी आम हो चला है। स्कूल प्रबंधन सहित ऐसे सभी लोगों को चाहिए कि स्कूल ही नहीं बल्कि स्कूल के बाहर और घर तक आवागमन वाले रास्ते पर बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। ताकि और किसी आदित्य को जिन्दगी हारनी नहीं पड़े।