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कहानी-त्रिकोण बनाम रेखा

रिषान उसका इशारा समझ रहा था। वह कहना चाहता था कि वह यह सब किआरा के इशारे पर ही कर रहा है। पर तब उसे दिया को उसके स्वास्थ्य से जुड़ा कटु सत्य भी बताना पड़ता। इसलिए उसे चुप रहना पड़ा।

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कहानी-त्रिकोण बनाम रेखा

कहानी-त्रिकोण बनाम रेखा

संगीता माथुर

मैं एक्टिंग नहीं कर रहा किआरा। मैं दिया से सचमुच प्यार करने लगा हूं।'
'नहीं' एक चीख मारकर किआरा गहरी नींद से उठ गई। उसका पूरा शरीर पसीने से तरबतर हो रहा था। उसने घड़ी देखी। रात के बारह बज रहे थे। रिषान और दिया अभी तक नहीं लौटे थे। किआरा मन ही मन उस घड़ी को कोसने लगी जब वह अपनी प्रिय सखी दिया को डॉक्टर को दिखाने ले गई थी। दिया को फेंफड़ों संबंधी कोई बीमारी है यह तो उसे पता था लेकिन बीमारी इतनी गंभीर है, यह उसे उस दिन ही पता लगा था। दिया की एक्सरे रिपोर्ट देख रहे डॉक्टर ने बहाने से दिया को बाहर भेज दिया था और किआरा की ओर मुखातिब हुए थे।
'आप उसकी बहन दिखती हैं!आपकी बहन के फेंफड़ों के छेद गड्डे बन चुके हैं। कभी भी फेंफड़े फट सकते हैं।'
किआरा कांप उठी थी। 'कोई इलाज?'
'अब उन्हें दवा से ज्यादा दुआ की जरूरत है। वे जितना खुश रहेंगी, खुले वातावरण में रहेंगी, उनके स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा। उनकी कुछ महीनों की जिंदगी को जितना खुशहाल बना सकें, बनाएं।'
किआरा सिहर उठी थी। उसे सपने में भी गुमान नहीं था कि उसकी प्रिय सखी कुछ ही महीनों की मेहमान है।

ड्राइव करती किआरा को गंभीर और शांत देख बोर होती दिया उसके मोबाइल से खेलने लगी।
'अरे,यह वॉल पर किसका फोटो लगाया है? बहुत हैंडसम है! तेरा बॉयफे्रंड है क्या?' दिया ने छेड़ा।
'दिया प्लीज मोबाइल रख दे।'
'ओह मतलब बॉयफे्रंड ही है। अब जल्दी से सारा मामला बता दे वरना मैं मैसेज पढऩा शुरू करती हूं।'
'दिया रुक जा।' किआरा समझा गई अब छुपाने से कोई फायदा नहीं है। उसने रिषान के बारे में सब बता दिया था।
'तुम सचमुच कितनी लकी हो! काश भगवान ने ऐसा कोई हैंडसम बंदा मेरी भी किस्मत में लिखा होता।' दिया ने ठंडी आह भरी तो किआरा एक बार फिर डॉक्टर की बात याद कर दुखी हो उठी। 'इस बेचारी को क्या पता भगवान ने इसकी किस्मत में क्या लिख दिया है?'
उस दिन से किआरा उदास रहने लगी थी जिसे सबसे पहले रिषान ने लक्षित किया। किआरा ने कुछ नहीं छुपाया। सब बताकर वह उसके कंधे पर सिर रख सिसकने लगी। 'क्या हम उसके लिए कुछ नहीं कर सकते?'

काफी सोचने के बाद किआरा को दिया को खुश करने का एक उपाय सूझा ही गया। पर उसके लिए रिषान का सहयोग आवश्यक था। 'रिषान, इस वक्त दिया की जिंदगी में दो चीजें ढेर सारी खुशियां ला सकती हैं। एक तो प्रकृति की गोद और दूसरा एक अदद बॉयफे्रंड। दिया इन दोनों के लिए पागल है। हम लोग नया साल मनाने गोवा जा रहे हैं तो क्यूं न दिया को भी साथ ले लें? पर बॉयफे्रंड की समस्या कैसे हल होगी? तुम उसके बॉयफे्रंड क्यों नहीं बन जाते?'
'पागल तो नहीं हो गई हो?' रिषान बौखला उठा था।
'हकीकत में नहीं बनना है, बनने का नाटक करना है।'
'नहीं, मैं नहीं कर सकता। लेकिन मैं ही क्यों?'
'क्योंकि हकीकत सिर्फ तुम्हें पता है। और तुम नाटक कर रहे हो यह सिर्फ मुझो पता होगा। वरना कुछ महीनों का बॉयफें्रड मैं कहां से ढूंढकर लाऊंगी? ' किआरा के झाूठ मूठ आंसू निकल आए थे।
दिया को साथ चलने को कहा तो एकबारगी तो वह साफ मुकर गई थी। 'ना बाबा ना, मुझो कबाब में हड्डी नहीं बनना।'
'अरे हम कौनसा हनीमून पर जा रहे हैं। बल्कि रिषान के एक दो दोस्त भी साथ चल रहे हैं। तुम साथ चलोगी तो मुझो कंपनी मिल जाएगी।' किआरा ने बहाना बनाया।
एयरपोर्ट पर दिया को देख रिषान ठगा सा रह गया था। वह पलटकर लौटने लगा था। 'मुझासे नहीं होगा किआरा।'

किआरा उसे जबरन दिया के पास ले गई। 'इसके दोस्तों ने ऐनवक्त पर प्रोग्राम बदल दिया तो इसका भी मूड खराब हो गया। कह रहा है मुझो भी नहीं जाना। अरे दिया है न हमारे साथ!' किआरा दोनों को थामकर आगे बढ़ गई। रिषान की हथेली जोर से दबाकर किआरा ने उसे इशारा भी कर दिया कि उसे यहीं से शुरू हो जाना है।

फ्लाइट के मध्य किआरा वॉशरूम होकर आई तो बहाने से उसने रिषान के साथ अपनी सीट बदल ली। फिर सोने का नाटक किया और रिषान की हथेली दबाई। रिषान ने नर्वस होकर अपना दूसरा हाथ दिया की ओर बढ़ाया। दिया ने अपना हाथ पीछे कर लिया। रिषान ने उसकी कलाई पकड़ ली। इस बार आश्वस्त करने वाले भाव से।

जब फ्लाइट डेबोलिम एयरपोर्ट पर उतरी रिषान बहुत अजीब सा महसूस कर रहा था। रात को दोनों सहेलियां एक कमरे में सोईं, पर सुबह घूमने जाने के वक्त किआरा ने सर्दी और बदनदर्द का बहाना बनाकर साथ चलने से इंकार कर दिया। और दिया और रिषान को जबरदस्ती घूमने ठेल दिया।
सागर की अठखेलियों के बीच दिया बेहद खुश थी। मस्ती मस्ती में फेनी के कुछ घूंट गले के नीचे क्या उतरे उसने अपना दिल रिषान के सामने खोलकर रख दिया। 'कभी कभी मुझो अपनी खास दोस्त किआरा से बहुत ईष्र्या होती है। उसके पास सब कुछ है और मेरे पास कुछ भी नहीं। जब छोटी थी तभी मां पापा अलग हो गए। हॉस्टल में पली बढ़ी। अपनों का प्यार क्या होता है कभी जान ही नहीं पाई। किआरा ही मेरी दोस्त, बहन सभी कुछ है। वह बहुत अच्छी है। रिषान, कभी भी मेरी दोस्त का विश्वास मत तोडऩा।'

रिषान उसका इशारा समझा रहा था। वह कहना चाहता था कि वह यह सब किआरा के इशारे पर ही कर रहा है। पर तब उसे दिया को उसके स्वास्थ्य से जुड़ा कटु सत्य भी बताना पड़ता। इसलिए उसे चुप रहना पड़ा। लेकिन दिया की सरलता ने उसके दिल में दिया के प्रति कोमल भावनाएं जगा दी थीं। दूसरी ओर दिया रिषान के चुंबकीय व्यक्तित्व के आकर्षण से बचाने का असफल प्रयास कर रही थी। होटल लौटकर किआरा के सम्मुख दोनों सहज बने रहने का प्रयास करते रहे। पर उनका अपराधबोध उनकी कमजोरी को उजागर कर किआरा के मन में संशय जगा रहा था।

मन की कमजोरी अगले दिन तन पर भी हावी हो गई। किआरा को रात में ही तेज बुखार चढ़ आया। सवेरे डॉक्टर ने देखकर होटल में ही विश्राम करने की सीख दे डाली। किआरा ने दोनों को अपनी कसम दिलाकर घूमने भेज दिया। और खुद देर तक मुंह ढांपकर रोती रही। दिया और रिषान की नजदीकियों की कल्पना कर वह घुटती रही। दवाइयों के असर से वह गहरी नींद सो गई। और फिर इस भयानक सपने ने उसे जगा दिया।

दरवाजे पर थपथप हुई। रिषान और दिया लौट आए थे। किआरा को पसीने से सराबोर देख दोनों चिंतित हो उठे। 'हमें जल्दी आना चाहिए था। वहां बीच पर टाइम का पता ही नहीं चला। कल सवेरे की फ्लाइट से ही हम मुंबई लौट जाएगें।'

वापसी की फ्लाइट में तीनों के बीच असहज मौन पसरा रहा। जिससे किआरा का शक और भी मजबूत होता चला गया। वह उस घड़ी को कोस रही थी जब उसने दिया को साथ लाने का निर्णय लिया था। अब तो एक ही उपाय है दिया को उसकी मौत का सच बता दिया जाए। खुद ही उसके कदम पीछे हट जाएगें। डॉक्टर से उगलवाना ही बेहतर रहेगा। वैसे भी चेकअप करवाए डेढ़ महीना हो चुका है। अब तो स्थिति और भी नाजुक हो गई होगी। मुंबई पहुंचकर किआरा ने डॉक्टर से अपांइटमेंट लिया और दिया को सूचित कर दिया। डॉक्टर को वह कह चुकी थी कि जो भी रिपोर्ट हो दिया के सामने बता दे। दोनों निकल ही रही थीं कि रिषान किआरा से मिलने आ पहुंचा। वह भी साथ हो लिया।

दिया का एक्सरे हो चुका था। गौर से एक्सरे देखते डॉक्टर चिल्ला उठे। 'मिरेकल! आपकी हालत में तो आश्चर्यजनक रूप से सुधार है। लगता है आपकी बहन आपकी बहुत केयर कर रही है। कीप इट अप!'
किआरा भौंचक्की सी कभी रिपोर्ट तो कभी डॉक्टर को देख रही थी। तभी दिया का मोबाइल बज उठा,'क्या वीजा हो गया! थैंक्स गॉड!'

सभी की प्रश्नवाचक नजरें अपनी ओर उठी देख उसने फोन बंद कर दिया। 'मैं हमेशा के लिए अपनी मौसी के पास अमरीका जा रही हूं। रिपोर्ट के अच्छा या बुरा होने से मुझो कोई फर्क नहीं पडऩे वाला था। जिसके पास तुम दोनों जैसे दोस्त हों, उसे जिंदगी से वैसे भी कभी कोई शिकायत नहीं होगी।' मुस्कराती दिया ने किआरा का हाथ थामा और उस पर रिषान का हाथ रख दिया। उसके चेहरे पर संतुष्टि की अनूठी आभा बिखर गई थी। दो बिंदुओं को जोडऩे वाली सीधी रेखा बनने में जो आनंद है, वो त्रिकोण का एक कोण बनने में कहां?