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जैन मुनि की हत्या का आक्रोश, राजस्थान में कल बंद रखेंगे प्रतिष्ठान

Karnataka Crime: कर्नाटक में जैन मुनि आचार्य काम कुमार नंदी की हत्या के विरोध और जैन तीर्थ स्थलों पर हो रहे कब्जों, जैन मंदिरों में चोरियां से आहत जैन समाज ने 20 जुलाई को प्रदेशव्यापी बंद का आह्वान किया है।

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जैन मुनि की हत्या का आक्रोश, राजस्थान में कल बंद रखेंगे प्रतिष्ठान

जैन मुनि की हत्या का आक्रोश, राजस्थान में कल बंद रखेंगे प्रतिष्ठान

जयपुर। कर्नाटक में जैन मुनि आचार्य काम कुमार नंदी की हत्या के विरोध और जैन तीर्थ स्थलों पर हो रहे कब्जों, जैन मंदिरों में चोरियां से आहत जैन समाज ने 20 जुलाई को प्रदेशव्यापी बंद का आह्वान किया है। बंद के दौरान जैन समाजबंधु अपने सभी प्रतिष्ठान बंद रखेंगे। जैन बंधुओं से 20 जुलाई को व्यापार, ऑफिस, दुकान और नौकरी से अवकाश रख केंद्र सहित सभी राज्यों की सरकारों से संतों और मंदिरों में सुरक्षा की मांग रखने की अपील की।

देशभर में पिछले 11 दिनों से मौन जुलूस, विरोध प्रदर्शन कर सरकार से संतों और मंदिरों की सुरक्षा की मांग की जा रही है। अब सकल जैन समाज ने 20 जुलाई को अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर विरोध दर्ज कराने का आह्वान किया है। श्री महावीरजी प्रबंध समिति, मुनिसंघ व्यवस्था समिति और राजस्थान जैन सभा के आह्वान पर समाज के सभी बंधु नारायण सिंह सर्किल स्थित भट्टारक जी की नसियां में सुबह 9 बजे एकत्र होंगे। वहां से राज्यपाल, मुख्यमंत्री, कलेक्टर को ज्ञापन देने जाएंगे। बैठक में सामूहिक रूप में सम्मिलित होकर सकल जैन समाज से अपने-अपने प्रतिष्ठान 20 जुलाई बंद रखकर इस कृत्य का विरोध करने की अपील की।

सेवाओं में कार्यरत समाजबंधुओं से अवकाश रखने की अपील
इसके साथ ही जहां-जहां भी समाजबंधु सेवाओं में लगे हुए हैं, चाहे वह सरकारी हो या निजी सेवा, सभी को उस दिन अवकाश रखकर बंद में शामिल होने की अपील की गई है। सभी व्यापार संघों से अपने-अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की गई है।

ये बोले मुनि
प्रताप नगर में चतुर्मासरत आचार्य सौरभ सागर ने कहा कि गुरुवार को बंद का आह्वान करना समाज की अपनी व्यवस्था, जिसे प्रत्येक समाज बंधुओ को एकजुटता के साथ पालन करना चाहिए। साधु, तीर्थ, मंदिर अगर सुरक्षित रहेंगे तो धर्म सुरक्षित रहेगा और धर्म सुरक्षित रहेगा तो संस्कार और संस्कृति सुरक्षित रहेगी।

बरकत नगर में चातुर्मास कर रहे आचार्य नवीन नंदी ने कहा कि किसी संत की समाधी होने और हत्या होने में बहुत फर्क है। संत की समाधी होती है तो जैन धर्म में कहा गया है उन्हे उच्च स्थान की प्राप्ति हो गई, किंतु जब हत्या होती है तो वह हत्या कहलाती है। साधुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी जितनी समाज की है, उतनी ही जिम्मेदारी सरकार की भी है।

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अब ये रखी मांगे
— पदविहार के दौरान साधु, संतों, आर्यिका माताजी को सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाए।
— जैन श्रमण संस्कृति बोर्ड का गठन किया जाए।
— जैन तीर्थो, मंदिरों, धर्मशालाओं में हो रही चोरियों के खिलाफ तत्काल रोक लगे।
— अल्पसंख्यक जैन समुदाय को "जैन छात्रावास" के लिए प्रत्येक जिलों में जमीन उपलब्ध करवाई जाए।
— पद विहार करने वाले प्रत्येक साधुओं के रात्रि विश्राम को लेकर प्रत्येक बीस किलोमीटर "सामुदायिक विश्राम स्थल" बनाएं जाए।


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