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जड़ों से जुड़े थे कुलिश जी…गागरडू गांव के विकास का मॉडल आज भी मिसाल

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूरचंद कुलिश दूरदृष्टा समाज सुधारक भी थे। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कंचन देवी कोठारी के जयपुर के दूदू उपखंड स्थित पैतृक गांव गागरडू को गोद लेकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा।
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फोटो पत्रिका नेटवर्क

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूरचंद कुलिश दूरदृष्टा समाज सुधारक भी थे। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कंचन देवी कोठारी के जयपुर के दूदू उपखंड स्थित पैतृक गांव गागरडू को गोद लेकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा। कुलिश जी मानते थे कि अपनी जड़ों से जुड़कर मिट्टी का कर्ज उतारना हर नागरिक का कर्तव्य है। इसी सोच के बूते अपने जीवनकाल में विकास की ऐसी नींव कुलिश जी ने रखी जो क्षेत्रवासियों के लिए वरदान समान हैं।

गागरडू के लिए ‘विकास पुरुष’

कुलिशजी के प्रयासों से गागरडू में जनसुविधाओं का विस्तार हुआ, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार हुआ। गागरडू में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल जैसी सुविधाओं के विकास से लेकर धार्मिक एवं सांस्कृतिक संरक्षण में भी कुलिश जी का बड़ा योगदान है। कुलिश जी ने यहां आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र बनवाया ताकि इलाज के लिए अन्यत्र नहीं भागना पड़े। बच्चों की शिक्षा के लिए सरकारी विद्यालय खुलवाया, छात्रावास एवं अध्यापकों के आवास बनवाए।

ग्रामीण कुलिश जी को गागरडू के लिए ‘विकास पुरुष’ मानते हैं। कुलिश जी के साथ उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कंचन देवी कोठारी का भी गागरडू गांव के विकास में योगदान रहा है। लोगों का कहना कि स्कूल बनने के बाद बच्चों को जयपुर या दूदू उपखंड तक भागदौड़ नहीं करनी पड़ती और आसपास के दर्जनों गांवों के विद्यार्थी छात्रावास में रहकर अध्ययन करने में मदद मिली है।

सांस्कृतिक संरक्षण में बड़ी भूमिका

धार्मिक एवं सांस्कृतिक संरक्षण के लिए कुलिश जी ने सार्वजनिक कुओं का निर्माण और प्राचीन बावड़ी का जीर्णोद्धार करवाकर जल संरक्षण का संदेश दिया। बा​लाजी मंदिर का निर्माण करवाया। कुलिश जी के रोपे पौधे आज विशाल वृक्ष बनकर ग्रामीणों को छाया दे रहे हैं।

कुलिश जी की गागरडू वासियों को सौगातें

-स्वास्थ्य केन्द्र, विद्यालय, छात्रावास, अध्यापकों के आवास की सौगात
-सार्वजनिक कुआं, विश्राम गृह, धर्मशाला व मंदिर निर्माण, बावड़ी का जीर्णोद्धार