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जड़ों से जुड़ाव : सोड़ा की माटी को विकास से संवार गए कुलिशजी, बदल दी तस्वीर

मेरी जन्मभूमि से आने वाले हर व्यक्ति के पैरों की माटी से मेरा घर पवित्र होता है। अपनी जन्मस्थली टोंक के मालपुरा स्थित गांव सोडा के लोगों के प्रति श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी के ऐसे ही भाव थे।

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फोटो पत्रिका नेटवर्क

मेरी जन्मभूमि से आने वाले हर व्यक्ति के पैरों की माटी से मेरा घर पवित्र होता है। अपनी जन्मस्थली टोंक के मालपुरा स्थित गांव सोडा के लोगों के प्रति श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी के ऐसे ही भाव थे। बचपन में सोडा से जयपुर आने के बाद भी कुलिश जी का अपनी जड़ों से जुड़ाव अनवरत रहा। हर समस्या को समाधान के पड़ाव तक पहुंचाना उनके व्यक्त्तिव में था, जन्मस्थली के लोगों की परेशानी पता चलने के बाद वे प्राथमिकता से निदान करवाते थे। सोडा के विकास के लिए उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और धार्मिक क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य करवाए। ग्रामीण बताते हैं कि कुलिश जी जब गांव आते थे तो लोगों से उनकी जरूरतें और समस्याएं समझते थे और समाधान करवाते थे।

आत्मीयता : सालों बाद मिले तो भावुक हो गए

ग्राम पंचायत सोडा के पूर्व सरपंच धन्नालाल पारीक बताते हैं कि करीब 30-35 वर्ष बाद जब कुलिश जी सोडा आए तो बहुत भावुक हो गए। गांव में पहुंचते ही आयुर्वेद चिकित्सालय के बरामदे में आकर बैठे और अपने बालसखा संपत नारायण शर्मा को बुलवाया। पारीक बताते हैं कि साल 1995 की बात है वे और संपत नारायण शर्मा जयपुर स्थित आवास पर कुलिश जी से मिले तो उन्होंने कहा था कि मेरी जन्मभूमि से आने वाले हर व्यक्ति के पैरों की माटी से मेरा घर पवित्र होता है। उनका यह भाव गांव और जड़ों के प्रति गहरे लगाव को दर्शाता है।

प्रेम : जो मांगा तत्काल दिया

कुलिश के 1987 में सोडा प्रवास के दौरान उनके सामने ग्रामीणों ने चिकित्सा सुविधा नहीं होने की समस्या रखी तो कुलिश जी ने तत्काल निर्णय लिया और जमीन खरीदकर अपने पिता स्व. बिरधीचंद कोठारी की स्मृति में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण कराया। इतना ही नहीं स्वास्थ्य केंद्र के उद्घाटन के दौरान ग्रामीणों ने माध्यमिक स्कूल खोलने की मांग रखी तो उसी दिन कुलिश जी ने जमीन चिन्हित करके स्कूल भवन का शिलान्यास किया। आज भी यहां कोठारी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय संचालित है।

श्रद्धा : बालाजी मंदिर का निर्माण करवाया

सोड़ा में बालाजी की एक प्रतिमा खुले स्थान पर स्थापित थी, कुलिश जी की माताजी की हनुमान जी में विशेष श्रद्धा थी। उनके आग्रह पर यहां मंदिर का निर्माण कराया गया। यह मंदिर वर्तमान में घाट के बालाजी मंदिर के नाम से क्षेत्र में प्रसिद्ध है।

पर्यावरण संरक्षण : 4 किमी में पौधरोपण

कुलिश जी के प्रकृति प्रेम की वजह से सोडा पर्यावरण संरक्षण की मिसाल है। उनके प्रयासों से जयपुर भीलवाड़ा स्टेट हाइवे से सोडा गांव तक लगभग चार किलोमीटर मार्ग पर दोनों ओर पौधरोपण कराया गया। वर्ष 1996 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैंरोसिंह शेखावत के कार्यकाल में सोडा की देवबनी में सघन पौधरोपण अभियान शुरू किया गया। इस अभियान के दौरान कुलिश जी और शेखावत ने कल्पवृक्ष का जोड़ा लगाया, जो आज भी है।

अपनों के बीच : विकास का खाका

कुलिश जी ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनते थे। उन्होंने गांव और आसपास के क्षेत्रों के विकास को लेकर कई ठोस पहल की, जिनमें शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्य आज भी क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। सेवानिवृत्त शिक्षक राधेश्याम शर्मा बताते हैं कि कुलिशजी गांव के विकास को लेकर हमेशा गंभीर रहते थे। वे ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी जरूरतों को समझते और उसी के अनुरूप स्थायी कार्य करवाते थे।

शिक्षा की नींव :भविष्य की सोच

शिक्षा और विकास की बात जब होती है तो सोडा के लोग सबसे पहले कुलिश जी की मजबूत पहल को याद करते हैं। उनके प्रयासों से बोया शिक्षा का बीज आज एक मजबूत वृक्ष बन चुका है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बना है।

सोडा निवासी सहायक प्रशासनिक अधिकारी गणेश शर्मा का कहना है कि शिक्षा क्षेत्र में कुलिश जी का योगदान अपूरणीय है। उनके प्रयासों से कई गांवों के बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। जिसकी बदौलत कई युवा विभिन्न सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं।

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय धोली के प्रधानाचार्य धर्मेंद्र जैन बताते हैं कि सोडा में विद्यालय और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थापना से जयसिंहपुरा, गरजेड़ा, बम्बोरी, अजमेरी, चैनपुरा, बावड़ी, चौसला, चावंडिया और सीतारामपुरा सहित कई गांवों के लोगों को लाभ मिला। इससे क्षेत्र के सैकड़ों विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त कर आगे बढ़ने का मौका मिला है।

राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के उपप्रधानाचार्य सुशील नायक ने बताया कि कुलिश जी की सोच विकास को लेकर हमेशा सकारात्मक रही। उनके प्रयासों से लाइब्रेरी और खेलकूद जैसी सुविधाएं विकसित हुई।