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कुलिश जन्मशती पर्व: कुलिश जी की निर्भीक कलम… पत्रकारिता की वो कलम जिसने समाज की दिशा बदल दी

Karpoor Chandra Kulish Birth Centenary: पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कुलिश जी ने निर्भीक कलम से समाज को बदलने का काम किया ही, एक न्यूज एक्टिविस्ट के रूप में दंगों को रोकने से लेकर श्रमिकों के रोजगार, राष्ट्रीय सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए खबरों को हथियार बनाकर देश-प्रदेश के हित में ऐसी पहल की, जो मिसाल बन गई।

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पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कुलिश जी, पत्रिका फोटो

पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कुलिश जी, पत्रिका फोटो

Karpoor Chandra Kulish Birth Centenary: पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कुलिश जी ने निर्भीक कलम से समाज को बदलने का काम किया ही, एक न्यूज एक्टिविस्ट के रूप में दंगों को रोकने से लेकर श्रमिकों के रोजगार, राष्ट्रीय सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए खबरों को हथियार बनाकर देश-प्रदेश के हित में ऐसी पहल की, जो मिसाल बन गई। उनकी विरासत आज की पत्रकारिता को प्रेरणा देती है।

अपने शहर से लगाव… मैं जयपुर को जबलपुर नहीं बनने दूंगा…

वर्ष 1962…. जबलपुर हिंदू-मुस्लिम दंगों व की आग में झुलस रहा था। जयपुर में भी हालात तनावपूर्ण बन रहे थे। तत्कालीन एसपी भवानी मल ने अपने एक संस्मरण में बताया कि एक राजनेता ने उन्हें फोन पर हालात बिगाड़ने की चेतावनी दी। उन्होंने कड़े शब्दों में जवाब दिया, कहा- आप हों या कोई और, जो रोड़े अड़ाएगा उससे पूरी सख्ती से निपटा जाएगा। अगले दिन 'राजस्थान पत्रिका' में खबर छपी, शीर्षक था, 'जयपुर को जबलपुर नहीं बनने दूंगा, एसपी की चेतावनी। दरअसल एसपी के वार्तालाप को कुलिश जी ने सुन लिया था, इसे ही उन्होंने खबर में रूप दिया। खबरों पर कुलिश जी की निगाह रहती थी, देख लेते थे दरवाजों के पीछे छिपा सच।

श्रमिकों से संवेदना…भरतपुर में सिमको वैगन फैक्टरी बंद नहीं होने दी

भरतपुर में सिमको वैगन फैक्टरी में लॉक आउट हुआ। तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया ने जीतने के बाद भी फैक्टरी खुलाने का वादा नहीं निभाया। कुलिश जी ने श्रमिकों की पीड़ा, और सरकार की वादा खिलाफी क्षेत्र के विकास के लिए न केवल खबरों के जरिए आवाज बुलंद की। उनकी प्रेरणा से ट्रेड यूनियन नेताओं ने दिल्ली में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात की। पीएम के निर्देश पर राजीव गांधी ने राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव से बात कर हल निकाला। अंततः 5 फरवरी 1981 को प्रशासन ने सिमको का लॉक आउट खत्म करवाया। कुलिश जी को मजदूरों की पीड़ा कचोटती थी, नहीं सह पाते थे जनता से वादाखिलाफी।

राष्ट्रभक्ति की भावना… ट्रॉफी हंटिंग एक्सपोज, पड़ी बाड़बंदी की नींव

बात दिसंबर 1978 की है, जब कुलिश जी को पता चला कि पाकिस्तान पैसे लेकर सऊदी के शहजादे बदर बिन अब्दुल अजीज अल सऊद और उनके बेटे को राजस्थान में ट्रॉफी हटिंग करवा रहा है। खोजी पड़ताल के बाद पत्रिका में 31 दिसंबर को खबर छपी कि अरब शहजादे की टोली ने भारत में 13 तिलोड़ पक्षियों का शिकार किया। खबर से हंगामा मच गया। दो दिन बाद ही हाईकोर्ट ने शिकार पर रोक लगाने के आदेश जारी किए। तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने विदेश राज्य मंत्री को जैसलमेर भेजा। अगले ही साल प्रदेश से सटी पाक सीमा की बाड़बंदी शुरू करवाई। पाठकों का इतना भरोसा था कि शासन-प्रशासन से पहले कुलिश जी को खबर मिलती थी।