
राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी
जयपुर। आंचलिक क्षेत्रों की आवाज को अखबारों के जरिए उठाने की जरूरत है, इस बात पर राजस्थान पत्रिका के संस्थापक कर्पूर चंद्र कुलिश जी ने 53 साल पहले जोर दिया था। इससे जुड़ा एक संस्मरण ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. शुभकाम आर्य आर्य ने साझा किया।
उनके अनुसार, अक्टूबर 1972 में कुलिश जी गंगापुर सिटी में ‘पत्रकार और समाज’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में पधारे थे। यह कार्यक्रम डॉ. आर्य के पिता गोवर्धन लाल आर्य के निमंत्रण पर आयोजित किया था। कुलिश जी उस गोष्ठी के मुख्य सहभागी थे।
डॉ. आर्य ने बताया कि कुलिश जी ने विद्वतापूर्ण उद्धोधन में जिले से एक दैनिक अखबार प्रकाशित किए जाने की जरूरत बताई थी। आयोजन के तुरंत बाद ही कुलिश जी को मुंबई जाना पड़ा था। तीन दिन बाद 26 अक्टूबर 1972 को उन्होंने गर्ग को पत्र लिखा था। पत्र में कुलिश जी ने लिखा कि उनके मन में यह बात रह-रह कर उठती है कि राजस्थान के आंचलिक क्षेत्रों की आवाज उठनी चाहिए और इसके लिए हर जिले से समाचार पत्र खड़े होने चाहिए। वहीं उन्होंने गोष्ठी में मिले प्रेमभाव के प्रति कृतज्ञता जताई थी।
प्रेषक : डॉ. शुभकाम आर्य, जयपुर
जन्म शताब्दी के महोत्सव पर, नमन श्रद्धेय कर्पूर चंद्र कुलिश को।
अद्वितीय गौरवशाली सफर पर, बधाई हो राजस्थान पत्रिका को।
गांव, शहर में सुबह सवेरे रहता है, सदियों से एक अनोखा इंतेजार।
हरके पाठक बेहद आतुर रहता है, कि कब आएगा पत्रिका अखबार।
खबरों की उत्सुकता बढ़ जाती है, जब दिख जाए साइकिल सवार।
सटीक खबरें पढ़ने को मिलती हैं, जब हाथ में हो पत्रिका अखबार।
काव्य और कहानियों का संकलन, लेकर आते हैं, बुधवार और रविवार।
महिलाओं के लिए विशेष संकलन, सतरंगी आता है, सतरंगी परिवार।
वर्षों से पाठकों को जीता है विश्वास, गांव ढाणी तक पहुंचाई है खबर हर बार।
हर पाठक को बनाया है, बेहद खास, श्रेष्ठ है राजस्थान पत्रिका अखबार।
कुमार जिंदल जैन, बालोतरा
कलम पैनी उज्ज्वल पत्रकारिता नाज है जन-मन कुलिश की लेखनी को आत्मीय नमन।
युवाओं में प्रेरणा जगाई, लोकलंग की सच्ची ताकत बताई।
नैतिकता की राह जीवन दर्शन, कुलिश की लेखनी को आत्मीय नमन।
जन सरोकार से हो गहरा नाता, समाज सुधार की जागृति लाता।
मर्यादा और पवित्रता समर्पण कुलिश की लेखनी का आत्मीय नमन।
माटी की गंध समेटे पत्रिका निष्पक्ष है पैगाम, देश-दुनिया की खबरें हर पल देता तमाम लोकप्रिय पत्रिका नंबर वन,
है सदा कुलिश की लेखनी को आत्मीय नमन।
सत्यनारायण नागोरी, राजसमंद
Updated on:
14 Mar 2026 06:24 pm
Published on:
14 Mar 2026 06:03 pm
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