
Shashthi Chath Chathi
जयपुर. विक्रम संवत में पंचाग की छठी तिथि को षष्ठी छठ या छठी कहते हैं। चंद्रमा की इस छठी कला में इंद्रदेव अमृत पान करते हैं। षष्ठी तिथि के स्वामी शिव—पार्वती के पुत्र कार्तिकेयजी हैं, जोकि स्कन्द के नाम से भी जाने जाते हैं। इस तिथि पर जन्मे लोगों को संतान सुख और सौभाग्य के लिए कार्तिकेयजी की पूजा—अर्चना जरूर करना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोेमेश परसाई बताते हैं कि इस तिथि में किए गए कार्य सार्थक होते हैं। यही कारण है कि षष्ठी तिथि को कीर्ति के नाम से भी जाना जाता है। शुक्रवार को आनेवाली षष्ठी तिथि का विशेष महत्व होता है। इस दिन यह तिथि सिद्धा कहलाती है जिसमें सभी कार्य सिद्ध होते हैं। हालांकि रविवार या मंगलवार को पड़नेवाली षष्ठी तिथि पर शुभ कार्य वर्जित हैं। इन दोनों दिनों पर षष्ठी तिथि मृत्युदा योग बनाती है।
षष्ठी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। मान्यता है कि इस तिथि पर कठिन कार्य शुरू करने से भले ही दिक्कतें आएं पर सफलता जरूर मिलती है। षष्ठी तिथि पर घर बनवाना, वास्तु, शस्त्र से संबंधित कार्य प्रारंभ कर सकते हैं। किसी भी पक्ष की षष्ठी तिथि में तेल से संबंधित काम वर्जित है। इस तिथि में यात्रा करना, दन्त कर्म व लकड़ी खरीदने-बेचने का कार्य करना शुभ रहता है।
शुक्ल पक्ष की षष्ठी में भगवान शिव का पूजन करना चाहिए लेकिन कृष्ण पक्ष षष्ठी में शिव पूजन करना वर्जित है। षष्ठी तिथि में जन्मे जातक संघर्षशील, आत्मनिर्भर और घुमक्कड़ी प्रवृत्ति के होते हैं। ये गुस्सैल भी होते हैं और इनमें अपनी बात मनवाने का गुण भी होता है। इनमें मेलजोल की भावना कम होती है। ये प्राय: अकेला रहते हैं और अन्य लोग इनको जल्दी लोग पसंद नहीं आते हैं। जिनसे इनका दिल मिल जाता है उनके प्रति निष्ठावान रहते हैं।
4 जनवरी 2021 को पौष कृष्ण पक्ष की उदया तिथि पंचमी सुबह 7 बजकर 14 तक रहेगी उसके बाद षष्ठी तिथि लग जाएगी। लेकिन षष्ठी तिथि अगले दिन यानि 5 जनवरी को तड़के 05 बजकर 47 मिनट तक ही रहेगी। कोई तिथि सूर्योदय के बाद आरंभ हो और अगले सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाती है तो उस तिथि का क्षय हो जाता है। इस प्रकार पौष कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि क्षय है।
Published on:
04 Jan 2021 10:26 am
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