
overcome stress
जयपुर। हमें सबसे पहले हमें ऐसे प्रयास करने चाहिए जिससे कि तनाव उत्पन्न ही न हो। इसके लिए अपनी जीवनशैली को बदलना होगा। छोटी-छोटी बातों से तनावग्रस्त होने के बजाय हमें किसी भी परिस्थिति का मुकाबला करने के लिए तैयार रहना चाहिए। ऐसे में बिल्कुल भी घबराना नहीं चाहिए। यदि कोई समस्या उठ खड़ी हो गई है तो धैर्य नहीं खोना चाहिए, बल्कि अपने विवेक को काम में लेना चाहिए।
जीवन में तनाव उत्पन्न ही न हो, इसके लिए दूसरा उपाय है कि व्यक्ति खुद को हमेशा किसी न किसी काम में व्यस्त रखे। बहुत पुरानी कहावत भी है- 'खाली दिमाग शैतान का घर होता है'।
आज हम जो भी काम करते हैं चाहे व्यवसाय हो, नौकरी या बेशक कबाड़ी का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हों, कोई भी कैसा भी काम हो चाहे बड़ा या छोटा उसे मन लगाकर करें। कोई भी काम बड़ा नहीं लगेगा यदि उसे बोझ समझकर न किया जाए तो। उदाहरण के तौर पर घर में झाड़ू भी लगाएं तो ऐसे कि लगे जैसे शेक्सपीयर अपना उपन्यास लिख रहा हो। आपके काम करने का तरीका हमेशा साफ और बढिय़ा रखना चाहिए।
हमेशा प्रसन्नचित्त मुद्रा में रहें। क्रोध को चेहरे पर न आने दें। ऑफिस या फैक्ट्री से घर आते ही सबसे पहले अपने पेंट, कमीज, कोट व टाई उतारकर खूंटी पर टांगते हैं और लुंगी पहनकर खुद को हल्का महसूस करें। ठीक उसी प्रकार घर में प्रवेश करने से पहले दो मिनट रुकें, ऑफिस में, दुकान में, फैक्ट्री में किसी पर गुस्सा आता हो, किसी बात को लेकर मूड ऑफ हो गया हो तो वह सब कूड़ेदान में डालकर ही जाएं। वर्ना आप कपड़े उतारकर शरीर को तो हल्का कर लेंगे लेकिन माथे पर तनाव की लकीरें खिंची ही रहेंगी।
बाहर लाए गए इस तनाव का सबसे पहला परिणाम पत्नी पर आता है। आप पत्नी पर गुस्सा उतारते हैं और पत्नी अपना गुस्सा बच्चों पर। कहां तो पत्नी अपने बच्चों से कहती है कि पापा 8 घंटे बाद घर आएंगे। बड़ा आनंद आएगा उनसे मिलकर, फल और मिठाई भी लाएंगे। लेकिन यदि पति तनाव लेकर घर आएगा तो पत्नी अपने मन में यही सोचेगी कि ऐसा आदमी तो 8 घंटे की जगह 12 घंटे बाद ही घर आए तो ही बढिय़ा रहेगा। कारण, जहां पहले घर स्वर्ग था, तनाव के कारण वहां महाभारत प्रारंभ हो गई। दो मिनट के अंदर घर नरक बन गया।
हम हमारी तुलना माचिस की एक तीली से कर सकते हैं। जैसे तीली में एक लंबी सी लकड़ी होती है और ऊपर का भाग गोल होता है जो कि बारूद से भरा रहता है। माचिस का घर्षण होते ही इसमें आग लग जाती है। ठीक वैसे ही हमारा शरीर भी माचिस की एक लंबी सी तीली जैसा है। हमारी खोपड़ी तीली के ऊपर वाला हिस्सा है। फर्क इतना ही है कि माचिस की तीली के ऊपर वाले भाग, खोपड़ी में बुद्धि व विवेक नहीं है इसलिए जरा से घर्षण से आग का रूप ले लेती है।
लेकिन हमारे माथे में तो बुद्धि, धैर्य व विवेक आदि गुण मौजूद हैं। हमें भी यही देखना है कि हम भी पत्नी या बच्चों की जरा सी भूल या गलती पर आगबबूला तो नहीं हो जाते हैं, यदि वास्तव में ऐसा ही होता है तो हम में और माचिस की तीली में क्या फर्क है? पर जब हमारे पास बुद्धि व विवेक है तो हमें गुस्सा जरा सा भी नहीं आना चाहिए।
बल्कि प्यार से, मुस्कुराकर व प्रसन्नचित होकर उन्हें इशारे-इशारे में गलती बता देनी चाहिए। मुंह से एक शब्द भी बोलने की जरूरत क्या है? पत्नी तो घर की लक्ष्मी है। उसे डांटना नहीं चाहिए। वह तो प्यार भरे एक शब्द से ही अपना तन-मन और विपत्ति में अपना धन भी दे देती है। वहीं बच्चों पर गुस्सा किस बात का? आखिर है तो अपना ही खून। यदि इस तरह घर में वातावरण बना रहा तो गलती कभी भी रिपीट नहीं होगी।
हमें हर हाल और परिस्थिति में मुस्कुराते रहना चाहिए। यदि पत्नी ने तुरई की सब्जी अगर गलती से कड़वी भी बना दी है तो उसे भगवान का प्रसाद समझकर खा लो और हंसते रहो, मन में यही विचार करो कि आज इसको भी तो कड़वी सब्जी ही खानी पड़ेगी। दूसरे दिन जब वह सब्जी परोसेगी तो उससे पहले खुद चख लेगी। इस तरह उसे बिना गलती को बताए, हमने गलती भी बता दी और सुधार भी बता दिया।
सुबह पलंग पर से उठें तो सबसे पहले लेटे-लेटे मुस्कुराकर ही उठें। हमें खुद में एक नई ऊर्जा का संचार होता हुआ महसूस होगा। जीवन में तनाव से मुक्ति चाहिए तो जिंदगीभर मुस्कुराते रहो। यही बड़ी रामबाण औषधि है।
आदमी को हर परिस्थति में आने वाली समस्याओं और दुखों का मजबूत मन से डटकर मुकाबला करना चाहिए। क्योंकि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। किसी पुरानी बात को लेकर चित्त प्रसन्न नहीं है या मूड ऑफ हो गया है तो आधा एक घंटा बढिय़ा संगीत सुनें। यदि बांसुरी बजाना आता हो तो सोने में सुहागा होगा। उससे मधुर स्वर या भजन निकालें।
शान्तिलाल कुचेरिया, जयपुर
Updated on:
15 Sept 2017 07:27 pm
Published on:
15 Sept 2017 07:21 pm
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