
केरल आपदा का दंश राजधानी तक, जयपुर के दंपती की भूस्खलन में मौत
अमित पारीक / जयपुर। केरल में सौ साल में आई मूसलाधार बारिश और भयंकर बाढ़ का दंश प्रदेश की राजधानी तक आ पहुंचा है। तीन दशक तक शहर में रहा दम्पती पलभर में काल के मुंह में समा गया। उनके शव दो दिन की कड़ी मशक्कत के बाद मलबे से निकाले जा सके। रविवार को उनकी अंत्येष्टि की गई।
भूस्खलन के कारण केरल के पत्तनमट्टा जिले में रह रहे राजन एमपी (53) और उनकी पत्नी रमणी (50) की मौत हो गई। दंपती पिछले तीन दशक से शहर में ही रह रहा था। तीन साल पहले ही परिवार केरल शिफ्ट हुआ था। रमणी की अन्य पांच बहनें शहर में ही रहती हैं। परिजनों की मौत के बाद वे सभी काफी आहत हैं। दुख की इस घड़ी में वे केरल नहीं जा पा रहे इसका भी उन्हें काफी अफसोस है।
पड़ोसियों के मुताबिक भूस्खलन
जयपुर में रह रहे परिचितों के अनुसार हादसे का शिकार दंपती वाय्यचुपुरा इलाके में रहता था। 15 अगस्त दोपहर 12 बजे तेज बाारिश के बाद अचानक पहाड़ का बड़ा हिस्सा ढह गया उसके बाद भूस्खलन में राजन का दो मंजिला मकान जमींदोज हो गया। यह सब कुछ इतना जल्दी हुआ कि उन्हें बचने का भी मौका नहीं मिला।
पड़ोसी देखते रह गए
मानसरोवर निवासी अनिल श्रीधर के मुताबिक घटना की जानकारी केरल में राजन के पड़ोस में रह रहे उनके पिता श्रीधरन ने उन्हें दी। दोपहर को हुए हादसे से चंद मिनट पहले श्रीधरन राजन से बात करके अपने घर में घुसे थे। तभी पहाड़ टूटने की आवाज सुन बाहर निकले तो सकते में आ गए। भूस्खलन के कारण पड़ोसी का मकान जमींदोज हो चुका था। दंपती का कहीं अता-पता नहीं था। उनकी सूचना पर दो दिन तक चले रेस्क्यू के बाद दोनें के शव मलबे से निकाले गए।
श्रीधरन को राहत शिविर ले गए
उधर, भूस्खलन के बाद रेस्क्यू अभियान चला रहे सेना के जवान श्रीधरन को राहत शिविर में ले गए तब से वे वहीं पर हैं।
Published on:
20 Aug 2018 10:21 pm
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