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सदन के अंदर ही नहीं बाहर भी महिलाओं के प्रतिनिधित्व की पैरवी की – माहेश्वरी

- पिंक सप्ताह के तहत पूर्व जलदाय व उच्च शिक्षा मंत्री व भाजपा विधायक किरण माहेश्वरी से खास बातचीत -

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जयपुर

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Jaya Gupta

Mar 06, 2020

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जयपुर। नगर निकाय और पंचायत चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण होने से शहरी व ग्रामीण सरकार में उन्हें प्रतिधित्व मिलने लगा। सरपंच, प्रधान, पार्षद और सभपति की जिम्मेदारी मिली तो महिलाएं आगे बढ़ती गई, लेकिन आज भी देश और प्रदेश की सबसे बड़ी 'पंचायतÓ संसद और विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं है। संसद और विधानसभा में 33 फीसदी महिला आरक्षण की मांग लम्बे समय से उठ रही है। पिंक सप्ताह के तहत आज पूर्व जलदाय व उच्च शिक्षा मंत्री व भाजपा विधायक किरण माहेश्वरी से खास बातचीत -
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प्र. पंचायत चुनाव में महिलाओं को आरक्षण है, फिर लोकसभा और विधानसभा में क्यों नहीं?
उ. महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए आरक्षण जरुरी है। सदन के भीतर ही नहीं बाहर भी हमेशा महिलाओं के प्रतिनिधित्व की पैरवी की है। जब मैं भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष थी और केंद्र में यूपीए की सरकार, उस समय 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर जोर-शोर आवाज उठाई थी। पंचायत चुनाव से महिलाओं में प्रतिनिधित्व की क्षमता बढ़ी है।

प्र. संसंद और विधानसभा में आरक्षण संविधान में संशोधन से मिलेगा, लेकिन राजनैतिक दल संगठन के भीतर तो महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित कर ही सकते हैं?
उ. करीब 15 साल पहले महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष थी और वसुंधरा जी मुख्यमंत्री। उस समय हमने तय किया था महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाएंगे। आज भाजपा के संविधान ने इसे कानून बना दिया गया कि ब्लॉक स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक ही हर कमेटी में 33 फीसदी सीट महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी गई। दूसरे दलों को भी इस पर विचार करना चाहिए।

प्र. सदन में दो सौ में केवल 25 महिला विधायक है? आधी आबादी के हिसाब से प्रतिनिधित्व कम नहीं है?
उ. पहले की तुलना में प्रतिनिधित्व बढ़ा है। करीब 20 साल पहले तक विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व केवल 5-6 प्रतिशत रहता था। अब बढ़कर 12-13 प्रतिशत हुआ है। इसमें और वृद्धि होनी चाहिए। हर जिले से कम से एक महिला विधायक आनी ही चाहिए।

प्र. सदन के भीतर महिला विधायक, महिलाओं के मुद्दें उठाती कम ही दिखाई देती हैं? क्या कारण है?
उ. जब महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा होती है, तब मुद्दे उठाए जाते हैं। जब महिला विधायक बोलती हैं तो उन्हें सभी सपोर्ट करते हैं। आगामी दिनों में जिन विषयों की अनुदान मांगों पर चर्चा है, उन विषयों पर महिलाओं के लिए बात रखेंगे।

प्र. महिला मंत्रियों को बड़े विभाग नहीं दिए जाते। महिला बाल विकास जैसे विभाग की ही जिम्मेदारी ज्यादा दी जाती है। ऐसा क्यों?
उ. ऐसा नहीं है। जब प्रदेश में हमारी सरकार थी, उस समय मुख्यमंत्री महिला थी और पांच महिला मंत्री थी। मुझे पहले जलदाय और बाद में उच्च शिक्षा की जिम्मेदारी दी गई। मेरे अलावा तीन और महिला मंत्री थी। उनके पास भी बड़े विभागों की जिम्मेदारी थी। केंद्र सरकार में वित्तमंत्री महिला है। पहले रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय जैसे बड़े महकमे भी महिलाओं के पास थे।

प्र. महिलाओं आगे कैसे बढ़े, क्या संदेश देना चाहेंगी?
उ. महिलाओं के लिए सबसे जरुरी है शिक्षित होना। हर महिलाओं के शिक्षा जरुर लेनी चाहिए। महिला शिक्षित होगी, तभी समाज शिक्षित होगा। शिक्षित होकर आगे बढ़े। दूसरी बात, कितने भी बड़े पद पर पहुंच जाएं, हमेशा संवेदनशील रहें। संवेदनशीलता हमारा नैसर्गिक गुण है। उसे बनाए रखे। हर क्षेत्र में महिलाओं को अपनी साथी महिलाओं की मदद जरुर करनी चाहिए। उन्हें बढ़ावा देना चाहिए।
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