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किशनबाग वानिकी परियोजना: प्री वेडिंग शूटिंग के लगेंगे पांच हजार रुपए, गाडइ की संख्या में भी होगा इजाफा

15 दिन में 6400 से अधिक सैलानियों ने टिकट लेकर की सैर  

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किशनबाग वानिकी परियोजना: प्री वेडिंग शूटिंग के लगेंगे पांच हजार रुपए, गाडइ की संख्या में भी होगा इजाफा

किशनबाग वानिकी परियोजना: प्री वेडिंग शूटिंग के लगेंगे पांच हजार रुपए, गाडइ की संख्या में भी होगा इजाफा

जयपुर। किशनबाग वानिकी परियोजना शहरवासियों को रास आ रही है। यहां के पत्थर, वनस्पति और धोरे को पसंद करने वालों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। उद्घाटन से अब तक 6400 लोग अब तक घूम चुके हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अब जेडीए यहां पर प्री—वेडिंग शूट की भी अनुमति देगा। पूरे दिन का पांच हजार रुपए किराया लिया जाएगा। पर्यावरण एवं वन विभाग की गाइडलाइन के अनुसार व्यवसायिक गतिविधि के लिए 20 हजार रुपए प्रतिदिन का किराया लिया जाएगा।
गुरुवार को परियोजना में सुविधाएं बढ़ाने के लिए बैठक हुई। इसमें गाइडों की संख्या बढ़ाने, कैफे, गार्ड से लेकर स्टाफ की ड्रेस, शहर भर में शाइनऐज बोर्ड लगाने के निर्देश आयुक्त गौरव गोयल ने दिए।


वर्ष भर का लक्ष्य 15 दिन में हुआ पूरा
—जब किशनबाग परियोजना की शुरुआत हुई तो वर्ष भर में टिकट से तीन लाख रुपए राजस्व का लक्ष्य रखा था। लेकिन 15 दिन में ही यह लक्ष्य पूरा हो गया। जो पैसा टिकट से आ रहा है, वह यहां की सुविधाओं को विकसित करने में खर्च किया जाएगा।

इसलिए खिंचे चले आ रहे लोग
-रेत से पत्थर तक: पश्चिमी राजस्थान में कभी समुद्र हुआ करता था। वहां जो रेत है, उसके होने का यही कारण है। इसके बाद इसी रेत का पत्थर बनना शुरू हुआ। इस प्रक्रिया में हजारों साल लगे। परियाजनों में जो पत्थर लगाए गए हैं, उन के ऊपर पानी बहने के निशान तक बने हैं। ये पत्थर राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए हैं। पश्चिमी राजस्थान को लेकर अमरीकी कलाकार विलियम सिलिन ने 20 से 14.5 करोड़ साल पहले की एक पेंटिंग बनाई है। इस पेंटिंग में उस समय का राजस्थान दिखाने की कोशिश की है। समुद्र को भी दिखाया गया है।
-धोक के पेड़: बरसात के दिनों में अलग ही रूप में दिखाई देते हैं। अरावली की पहाडिय़ों पर उगता है। जयपुर के आस-पास सर्वाधिक हैं। ये पेड़ भी पहाड़ पर लगाए गए हैं। बरसात के दिनों में अलग ही छटा बिखेरते हैं।
-ज्वालामुखी: राजस्थान के बाड़मेर, पाली और जोधपुर के हिस्से में ज्वालामुखियों ने तमाम निशान हैं। वहां से जो पत्थर निकलता है, उस पर ज्वालामुखी के निशान मिलते हैं। जानकारों की मानें तो 75 करोड़ साल पहले ये घटना हुई होगी। ऐसे पत्थरों को लाकर यहां पर रखा गया है।
-रोई के पौधे: खेजड़ी, भू-बावल, कैर, लाणा के फूल, लांकि मूल बेहद खास पौधे माने जाते हैं। बरसात के दिनों में यह सुंदर दिखते हैं। बाकी ऋ तुओं में सामान्य से ही दिखाई देते हैं।