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कोटा दशहरा मेला: दशहरे में गूंजा धोरों का संगीत

दशहरा मेले के विजयश्री रंगमंच पर शुक्रवार रात आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाड़मेर के लोक कलाकारों ने परम्परागत वाद्य यंत्रों के साथ सुरीली तान छेड़ी तो उपस्थित लोग मंत्रमुग्ध हो गए।

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Shailendra Tiwari

Oct 31, 2015

दशहरा मेले के विजयश्री रंगमंच पर शुक्रवार रात आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाड़मेर के लोक कलाकारों ने परम्परागत वाद्य यंत्रों के साथ सुरीली तान छेड़ी तो उपस्थित लोग मंत्रमुग्ध हो गए।

लोक कलाकारों की 15 सदस्यीय टीम ने एक के बाद एक लोकगीतों की प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में समां बांध दिया। मुख्य अतिथि निगम के पूर्व उपमहापौर योगेंद्र खींची, विशिष्ट अतिथि भाजपा नेता राजकुमार माहेश्वरी थे। अध्यक्षता नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र त्यागी ने की।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में जयपुर के राज म्यूजिकल गु्रप के कलाकारों ने फिल्मी सदाबहार गीतों की प्रस्तुतियां दी। इस दौरान उन्होंने सागर किनारे दिल ये पुकारे....., वादा करले साजना..... सरीखे फिल्मी गीत सुनाए।

रात सवा दस बजे बाड़मेर के मांगणियार लोककला मंडल के कलाकारों ने परम्परागत वेशभूषा में सज-संवरकर ढोलक, कमाइचा, करताल, सारंगी, बीन, अलगोजा, मुरली, मोरचंग, भपंग आदि वाद्य यंत्रों पर संगत करते हुए लोकगीत सुनाए तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। इसके बाद करीब डेढ़ घंटे तक लगातार एक के बाद एक केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देस..., लड़ली लूमा झूमा, म्हारो गोरबंद नखराळो..., कृष्ण भक्ति पर आधारित श्री राधारानी दे द्यो बांसुरी मोरी, नींबूड़ा-नींबूड़ा..., दमादम मस्त कलंदर... सरीखे लोक गीतों व भजनों की प्रस्तुतियां दी।

39 देशों में दे चुके प्रस्तुतियां
मां गणियार लोककला संस्थान के मुखिया भुट्टो खान ने बताया कि पुराने जमाने में राजघरानों के परिवारों में मांगलिक कार्य व शुभ अवसरों के दौरान मांगणियार जाति के लोग परम्परागत वाद्य यंत्रों पर गीत पेश करते थे। यह उनकी परम्परागत कला है। उनकी कला का प्रदर्शन अब तक रूस, जापान, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया सहित 39 देशों में कर चुके हैं।

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