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कांग्रेस के दर पर दावेदारों की भीड़, तय हो सकता है टिकट वितरण का फॉर्मूला

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जयपुर

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Dinesh Saini

Jul 23, 2018

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा की अगुवाई में बनी कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी के सोमवार को जयपुर दौरे के साथ ही कांग्रेस के दर पर दावेदारों की भीड़ दिखाई दी। एयरपोर्ट पर शैलजा के स्वागत से लेकर स्टेच्यू सर्किल के पास एक मैरिज गार्डन में कांग्रेस की चुनावी कार्यशाला तक दावेदार अपने अपने चुनावी कारतूस-तमंचों को लेकर पूरी ताकत के साथ पहुंचे।


कांग्रेस की विधानसभा चुनाव स्क्रिनिंग कमेटी की मुखिया शैलजा शनिवार सुबह जयपुर एयरपोर्ट पहुंची तो वहां पहले से कांग्रेस कार्यकर्ताओं-नेताओं की भारी भीड़ जमा थी। प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट खुद शैलजा की अगुवानी करने पहुंचे, लेकिन भीड़ में ज्यादातर नेता टिकटार्थी थे। कई नेता तो कल ही पहुंच चुके स्क्रीनिंग कमेटी के दो अन्य सदस्यों ललितेश त्रिपाठी और शाकिर सनादी से भी मिल लिए। टिकटार्थियों का मेला बिड़ला सभागार के सामने स्थित एक मैरिज गार्डन में आयोजित कांग्रेस की चुनावी कार्यशाला में भी दिखा। नेताओं से आशीर्वाद लेने की मुद्रा में पहुंचें टिकटार्थियों ने यहां भी अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की। चुनावी कार्यशाला में कांग्रेस की ओर से दिल्ली से भेजे गए विशेषज्ञ कांग्रेस नेताओं को चुनाव प्रबंधन की ट्रेनिंग देंगे। यहां ट्रेंड हुए नेता अपने अपने जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं को ट्रेंड करेंगे। कार्यशाला के बाद स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक होगी। इसमें सम्भावित प्रत्याशियों पर मंथन किया जाएगा।


स्क्रीनिंग कमेटी कांग्रेस के सभी पूर्व सांसदों, विधायकों और पार्टी के प्रभारी-सहप्रभारियों से अलग अलग मुलाकात करेगी...प्रत्येक सीट पर संभावित प्रत्याशियों की खोज में दावेदारों का दायरा तय करेगी...चयन का क्या फॉर्मूला हो, इस पर मंथन होगा...देखा जाएगा कि लगातार दो बार चुनाव हारे, 70 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं और पिछला चुनाव 50 हजार से मतों से हारे प्रत्याशियों को टिकट दिया जाए या नहीं...इसके बाद तीन तीन दावेदारों के पैनल बनाकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को सौंपे जाएंगे..यानी टिकट का आखिरी फैसला आलाकमान ही करेगा।


- तय हो सकता है टिकट वितरण का फॉर्मूला
- ज्यादा मतों से हारे उम्मीदवार हो सकते हैं बाहर
- 70 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं के टिकट पर भी संकट
- 2 या इससे ज्याद बार हारे नेताओं का कट सकता है टिकट
- जातिगत समीकरणों को भी कमेटी बनाएगी टिकट का आधार

कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी का दौरा कांग्रेस के लिए इसलिए भी अहम है कि इस बार दावेदारों की संख्या ज्यादा नजर आ रही है। कांग्रेस के सामने क्या हो सकती है चुनौतियां-

कांग्रेस आगामी चुनाव में सत्ता में आने के दावे कर रही है.. लेकिन उसके सामने चुनौतियां कम नहीं है... आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व के बीच तालमेल बिठाने के साथ कई ऐसी कमियां है.. जिन्हें वक्त रहते सुधारने की जरूरत है। ग्राफिक्स के जरिए समझते है क्या हैं कांग्रेस की राह के पांच बड़े रोड़े... जिन पर कांग्रेस संगठन को काम करना होगा... पहला मुद्दा नेतृत्व का है... जो कांग्रेस के लिए बड़ा सवाल है...

1- प्रदेश में गहलोत और पायलट खेमा सक्रिय है। हाल ही में प्रवक्ताओं के लिए इंटरव्यू लेने आई कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी गहलोत और पायलट में से बेहतर कौन का सवाल कर इस बात को हवा दे दी थी। ऐसे में प्रदेश में नेतृत्व का मुद्दा कांग्रेस के लिए बड़ा सवाल बना हुआ है।

2- दूसरी बात मल्टी पावर सेंटर की है.. जिसमें कांग्रेस के बड़े नेता खेमेबाजी में जुटे हैं। अशोक गहलोत, सचिन पायलट के अलावा सीपी जोशी, भंवर जितेन्द्र सिंह सहित ऐसे नेता है.. जो प्रदेश में कांग्रेस का पावर सेंटर माने जाते हैं... ऐसे में मल्टी पावर सेंटर भी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है।

3- वहीं, तीसरा और सबसे अहम मुद्दा संगठन बाद में पहले टिकट का है.. जो कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है... कार्यकर्ता और बूथ को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे मेरा बूथ मेरा गौरव अभियान इसकी बानगी है। इसमें नेता बूथ मजबूती पर कम बल्कि टिकट के लिए दावेदारी करते ज्यादा नजर आए। कई बार तो हाथापाई भी हुई। जिसमें कांग्रेस के बड़े पदाधिकारियों को पीटा गया।

4- इसके अलावा जातीय समीकरण का मुद्दा भी कांग्रेस के लिए चुनौती है। हाल ही में बीजेपी ने मदनलाल सैनी को प्रदेशाध्यक्ष बनाकर जातिगत कार्ड खेला है। ऐसे में कांग्रेस के लिए भी जातीय समीकरण को साधना अहम चुनौती है।

5- पांचवीं चुनौती कमजोर प्रतिरोध की है.. जिसमें जनता की नजर में कांग्रेस पिछले साढे चार साल के कार्यकाल में जनता के मुद्दे को मजबूती से नहीं उठा पाई और कमजोर विपक्ष की भूमिका में नजर आई। ऐसे में इस छवि को दूर करना भी कांग्रेस के लिए अहम माना जा रहा है।


बहरहाल इस बार का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए नाक का सवाल बना हुआ है। खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी राजस्थान से जीत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। एंटी इनकमबेंसी की वजह से हर पांच साल में सरकार बदलने की परंपरा के चलते कांग्रेस को सरकार आने की पूरी उम्मीद है। हालांकि नेताओं की आपसी खींचतान कांग्रेस की जीत में बाधा बन सकती है।