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Maa Kushmanda Worship Benefits मां कूष्मांडा की कृपा के बिना सफल नहीं हो सकता पालिटिकल कैरियर, जानिए ये खास वजह

यूं तो मां कूष्मांडा की पूजा—अर्चना सभी को करना चाहिए पर जो लोग राजनीति में कैरियर बनाना चाहते हैं उनके लिए तो यह बहुत जरूरी है। मां कूष्मांडा की कृपा के बिना किसी का भी पालिटिकल कैरियर सफल नहीं हो सकता। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि इसकी अहम वजह भी है।  

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Kushmanda Mata Ki Puja Ke Labh Benefits of worshiping Maa Kushmanda

Kushmanda Mata Ki Puja Ke Labh Benefits of worshiping Maa Kushmanda

जयपुर. नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। दुर्गाजी के इस चौथे स्वरूप को आदिशक्ति कहा जाता है क्योंकि ब्रहृांड की उत्पत्ति मां कूष्मांडा द्वारा ही की गई है। शरणागत बनकर सच्चे हृदय से इनकी उपासना करने से धीरे—धीरे सभी दुख दूर होते हैं और जीवन सुखद बन जाता है।

यूं तो मां कूष्मांडा की पूजा—अर्चना सभी को करना चाहिए पर जो लोग राजनीति में कैरियर बनाना चाहते हैं उनके लिए तो यह बहुत जरूरी है। मां कूष्मांडा की कृपा के बिना किसी का भी पालिटिकल कैरियर सफल नहीं हो सकता। इसकी अहम वजह भी है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि मां दुर्गा के नौ रूप नौ ग्रहों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।

मां दुर्गा का चौथा स्वरूप यानि माता कूष्माण्डा सूर्य का मार्गदर्शन करती हैं। सूर्यदेव नवग्रहों के राजा हैं और राजनीति, राजकीय कार्यों, राजकीय सम्मान के कारक भी हैं। मां कूष्मांडा की उपासना से सूर्य के कुप्रभावों से बचाव होता है और अच्छे फलों में वृद्धि होती है। पूरे ब्रह्मांड के साथ ही सूर्य में अवस्थित तेज इन्हीं की छाया है।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार मां कूष्मांडा की कांति और प्रभा से ही सूर्य का अस्तित्व है। सूर्य के समान ही देवी कूष्मांडा भी दैदीप्यमान हैं। खास बात तो यह है कि कूष्मांडा माता का निवास सूर्यमंडल के अंतरलोक में है। मान्यता है कि केवल मां कूष्मांडा ही यहां निवास कर सकती हैं। सूर्य के तेज को नियंत्रित करने की क्षमता और शक्ति केवल उन्हीं में ही है।

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