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मॉनिटरिंग में कमी: परकोटे में अब भी ई-रिक्शा की मनमर्जी, ऑटोरिक्शा भी हुए बे-लगाम

जयपुर. परकोटे में मनमर्जी से चलने वाले ई-रिक्शाओं पर सोमवार को कुछ लगाम जरूर लगी। अधिकतर ई-रिक्शा अपने आवंटित जोन क्षेत्र में ही चलते दिखाई दिए, लेकिन इनके कारण ऑटोरिक्शा की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है। राजस्थान पत्रिका के दूसरे दिन सोमवार के जायजे में ई-रिक्शाओं से अधिक ऑटोरिक्शा चलते नजर आए। जिन ई-रिक्शाओं […]

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जयपुर. परकोटे में मनमर्जी से चलने वाले ई-रिक्शाओं पर सोमवार को कुछ लगाम जरूर लगी। अधिकतर ई-रिक्शा अपने आवंटित जोन क्षेत्र में ही चलते दिखाई दिए, लेकिन इनके कारण ऑटोरिक्शा की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है। राजस्थान पत्रिका के दूसरे दिन सोमवार के जायजे में ई-रिक्शाओं से अधिक ऑटोरिक्शा चलते नजर आए। जिन ई-रिक्शाओं का संचालन हो रहा था, उनमें अधिकतर ने जोन आवंटन पत्र चस्पा कर रखा था। हालांकि, यातायात पुलिस की मॉनिटरिंग के अभाव में नियमों की शत-प्रतिशत पालना नहीं हो पा रही है और अब भी कुछ ई-रिक्शा मनमर्जी से दौड़ते मिले।

राजस्थान पत्रिका में सोमवार के अंक में 'जोन-वोन मैं क्या जानूं रे… परकोटे में मर्जी से दौड़ा रहे ई-रिक्शा, आवंटन पत्र भी नहीं' शीर्षक से समाचार प्रकाशित होने के बाद ई—रिक्शा चालकों में खलबली मच गई। इसके बाद रिक्शा चालक एक जोन से दूसरे जोन में जाने से बचते रहे और अपने ही जोन की सवारी बैठाते नजर आए। हालांकि, कुछ रिक्शा चालक अभी भी बड़ी चौपड़ से चांदपोल तक की सवारी बैठाते दिखाई दिए, जबकि दोनों ही अलग-अलग जोन में आते हैं। बड़ी चौपड़, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, चांदपोल बाजार और हवामहल बाजार में ऑटोरिक्शा का आवागमन अधिक दिखाई दिया। बड़ी चौपड़ के आस-पास व चांदपोल बाजार में जाम की स्थिति बनी रही।

मनमर्जी से वसूल रहे किराया

ई-रिक्शाओं की संख्या निर्धारित करने के बाद परकोटे में अधिकतर ऑटोरिक्शा चालक एक चौपड़ से दूसरी चौपड़ तक सवारी बैठाने लगे हैं, जबकि पहले वे सिंगल सवारी ही बैठाते थे। अब ये ऑटो चालक भी ई-रिक्शा की तरह तीन से चार सवारी बैठाने लगे हैं। हालांकि, वे किराया मनमर्जी का वसूल रहे हैं। रिक्शा चालक एक चौपड़ से दूसरी चौपड़ तक का किराया 10 रुपए प्रति सवारी ले रहे हैं, वहीं ऑटोरिक्शा चालक 20 रुपए तक वसूल रहे हैं।

इन पर काम हो तो मिले राहत

— ई-रिक्शा के साथ ऑटोरिक्शा की संख्या भी निर्धारित की जाए।
— ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाए।
— ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए।
— सवारी लेने के लिए चौपड़ों व गेटों के पास लेन सिस्टम विकसित किया जाए।

अवैध रूप से चलने वाले ई-रिक्शा चालक बचते रहे, लेकिन ऑटोरिक्शा की संख्या बढ़ गई है। इनकी भी संख्या निर्धारित होनी चाहिए, जिससे परकोटे में जाम की समस्या से राहत मिले।
- राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, अध्यक्ष, त्रिपोलिया बाजार व्यापार मंडल

ई-रिक्शाओं को आवंटित जोन में चलवाने का हम यथासंभव प्रयास कर रहे हैं। ऑटो की संख्या भी कंट्रोल कर रहे हैं।
- योगेश दाधीच, एडिशनल कमिश्नर, यातायात

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