
ओमप्रकाश शर्मा/ जयपुर। जैसलमेर के नाचना क्षेत्र में उपनिवेशन (कॉलोनाइजेशन) कार्यालय से फर्जी तरीके से कई लोगों के नाम सरकारी जमीन आवंटित कर दी गई। एक शिकायत पर उपनिवेशन विभाग ने 17 आवंटन की जांच शुरू की तो मामला सुरसा की तरह बढ़ता ही गया। अब तक 184 आवंटन फर्जी माने गए हैं, जिनके मूल दस्तावेज बीकानेर स्थित उपनिवेशन मुख्यालय में तलब किए गए हैं। घोटाला बड़े स्तर पर देखकर एसीबी ने भी एफआइआर दर्ज करने का निर्णय लिया है।
घोटाले में कितनी जमीन हड़पी गई, इसकी गणना की जा रही है। एक आवंटन में कम से कम 25 बीघा जमीन बताई जा रही है। इससे साफ है कि मामला सैकड़ों बीघा का है। यह सब 200 चक की जांच में सामने आया है। अभी 400 चक की जांच बाकी है। घोटाले में प्रभावशाली लोग शामिल हैं। ऐसे में जांच कर रहे अधिकारियों ने खुद के तबादले की आशंका तक जताई है।
मार्च में मिली थी जानकारी
नाचना में फर्जी तरीके से 17 आवंटन की जानकारी मार्च में मिली थी। संदिग्ध आवंटनों पर 17 जनवरी 2006 की तारीख अंकित है। इस तारीख को आवंटन सलाहकार समिति ने 54 पट्टे जारी किए थे। पड़ताल में सामने आया कि इनमें 17 पट्टों का जिक्र ही नहीं है। ऐसे में पट्टा बुक की पड़ताल हुई। पट्टा बुक जारी ही 5 मई 2016 को हुई थी। इस पर सतर्कता शाखा (उपनिवेशन) ने जांच की तो 167 और आवंटन संदेहास्पद पाए गए। अब उपनिवेशन कार्यालय ने नाचना तहसीलदार को सभी आवंटन से सम्बंधित मूल दस्तावेज के साथ तलब किया है।
जांच शुरू हुई तो कार्यालय में लगा दी थी आग
मामले की जांच शुरू हुई तो कार्यालय से दस्तावेज नष्ट करने का षड्यंत्र शुरू हो गया था। नाचना स्थित उपनिवेशन कार्यालय में 24 अप्रेल की रात को खिड़की तोड़कर आग लगा दी गई थी। स्थानीय पुलिस इसकी जांच कर रही है।
एसीबी में एफआइआर दर्ज करने के आदेश
मामले को लेकर उपनिवेशन कार्यालय से एसीबी के डीजी बीएल सोनी को भी सूचना दी है। प्रारम्भिक पड़ताल बाद जैसलमेर चौकी ने मामले में एफआइआर दर्ज करने की सिफारिश की है। एसीबी मुख्यालय ने इस पर तत्कालीन तहसीलदार गजेन्द्र सिंह, वरिष्ठ सहायक योगेन्द्र कुमार, कनिष्ठ सहायक शिवराज, पटवारी चद्रभान, विक्रम सिंह, किशोर व अन्य कर्मचारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
2016 के मामले ने भी पकड़ी गति
उपनिवेशन कार्यालय में इससे पहले वर्ष 2018 में भी फर्जीवाड़ा सामने आया था। नाचना में एसीबी ने पहला मामला वर्ष 2016 में दर्ज किया था। तत्कालीन उपनिवेशन उपायुक्त ने कई आदेश गलत तथ्यों के आधार पर कर दिए थे। इस आधार पर कई लोगों को जमीनें आवंटित कर दी गई। ऐसे 234 मामले संदेह के घेरे में आए थे। इसमें एसीबी ने आरएएस अरुण प्रकाश शर्मा को आरोपी बनाया। लम्बे समय बाद अब एसीबी ने मामले में तफ्तीश की गति बढ़ाई है। जांच अधिकारी बदला है तथा सहयोग के लिए टीम भी गठित की है।
200 चक की जांच में गड़बड़ी सामने आई है। चार सौ चक की जांच होना बाकी है। मूल दस्तावेज जब्त किए जा रहे हैं, जिसमें ऐसे आवंटनों की संख्या और सामने आ सकती है।
- महावीर सिंह राजपुरोहित, अतिरिक्त आयुक्त उपनिदेशक (सतर्कता), बीकानेर
प्रारम्भिक जांच में जो तथ्य सामने आए, उनके आधार पर एफआइआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं।
- बीएल सोनी, डीजी, एसीबी
Published on:
17 Jun 2021 02:24 pm
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