
mining areas: दूर होंगी खनन क्षेत्रों की वैधानिक बाधाएं
जयपुर। शहर के उपनगरीय व आसपास के क्षेत्रों में खनन क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर वैधानिक खनन में आ रही बाधाओं को दूर किया जाएगा, ताकि शहरी क्षेत्र के आसपास के इलाकों से अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाई जा सके और वैध खनन से रोजगार, निवेश व सरकार को राजस्व प्राप्त हो सके।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 22 जून को विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान शहरी क्षेत्र के आसपास अवैध खनन पर प्रभावी कार्यवाही करते हुए वैधानिक खनन की संभावनाओं को तलाशने के निर्देश दिए थे। जयपुर, जोधपुर, अजमेर, भीलवाड़ा और बीकानेर में शहरी क्षेत्रों में मेसेनरी स्टोन, लोह अयस्क, सेंड स्टोन, मार्बल आदि खनि संपदा है। इन क्षेत्रों मेें उपलब्ध मिनरल की पहचान, उससे होने वाली संभावित आय, संभावित पर्यावरणीय या अन्य मुद्दें, संभावित खनन क्षेत्र का एरिया, लोकेशन का सर्वें किया जाए। उन्होंने कहा कि सर्वे रिपोर्ट में क्षेत्र के नक्शें व फोटोग्राफ्स का भी समावेश किया जाए।
अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम डॉ. सुबोध अग्रवाल ने कहा कि जयपुर की आमेर तहसील के अरणिया लखेर, मेवल, सुन्दर का वास के साथ ही कालवाड़, खोराश्यामदास और दांतली-सरोली में मुख्यत: मेसेनरी स्टोन का चोरी छिपे खनन हो रहा है। इसी तरह से जोधपुर के बजली, केरु आदि में लेड जिंक और जोधपुरी सजावटी पत्थर सेंड स्टोन खनिज उपलब्ध है। भीलवाड़ा के जिपिया, धूलीखेड़ा आदि में लोहअयस्क व मेेसेनरी स्टोन की संभावनाएं है। बीकानेर की छोटी नाल व बड़ी नाल में बजरी और क्ले माइंस बताया जा रहा है तो अजमेर के दीपकनगर व आसपास के इलाकों में मार्बल और मेसेनरी स्टोन के भण्डार है। उन्होंने बताया कि यह सभी क्षेत्र शहर या उसकी पेराफेरी में स्थित है और इनमें से कई स्थानों पर अवैध खनन जारी है। इन व इस तरह के अन्य क्षेत्रों में माइनिंग प्लाट्स के चिन्हीकरण व ऑक्शन में आ रही बाधाओं को दूर कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
Published on:
06 Aug 2021 06:23 pm
